संपादकीय

सहयोगी दलक सेहो अप्पन चिंता छैक

धर्मेन्द्र कुमार झा (प्रबंध संपादक)
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भाजपाक विरुद्ध बनाओल गेल विपक्षक गठबंधन “इंडिया” कांग्रेस लेल एखनहुँ महत्वपूर्ण अछि, त’ ममता बनर्जी लेल ई एकटा हास्यास्पद विषय अछि। एहि गठबंधनके कियो ठगबंधन कहैत अछि त’ कियो एकरा विपक्ष द्वारा कएल गेल एकटा “मजाक” सिद्ध करबाक प्रयास करैत अछि। मुदा, जाहि तरहेँ ई इंडिया गठबंधन बनाओल गेल त’ लागल जे, भाजपाके लेल 2024 के लोकसभा चुनाव कठिन होयत। दू दर्जनसँ बेसी दलक सहमतिसँ इंडिया गठबंधनक कएक गोट बैसार भेल, मुदा बात सीट बंटवारासँ शुरू होइत सीटे बंटवारा धरि अटकैत रहल। फलतः गठबंधनक अगुआ प्रदेश सीएम नितीश कुमार, गठबंधन त्यागि भाजपाक संग गेलाह। ममता बनर्जी सेहो, बंगालक हर सीट पर दावा करैत कांग्रेस पार्टीके कोनो दशा बांकी नहि रखलनि। आम आदमी पार्टी त’ पहिनहिसँ पंजाबके ल’ क’ अप्पन स्थिति स्पष्ट करैत रहल अछि। तहिना महाराष्ट्रमे सेहो पेंच एखनहुँ फंसले सन अछि, संगहि सपा मुखिया अखिलेश यादवक नजैरमे कांग्रेस पार्टी, उत्तरप्रदेशमे मात्र एक – दू सीटक अधिकारी अछि। सोझ भाषामे कहल जाए त’ इंडिया गठबंधनसँ, बेराबेरी गठबंधनक तमाम प्रमुख दलक मोहभंग भेल जा रहल छैक। मुदा कांग्रेस पार्टीके एखनहु भरोस छैक कि, देशक तमाम विपक्षी पार्टी एकजुट भ’ आगामी चुनावमे भाजपाके चुनौती देत। काल्हिए, कांग्रेस पार्टीक वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, अप्पन वक्तव्य जारी करैत विपक्षके एकजुट रहबाक आव्हान कएलनि। त’ राहुल गाँधी अप्पन प्रत्येक भाषणमे विपक्षी एकजुटताक महत्व उजागर करिते रहैत छथि। मुदा भाजपाक रणनीतिके आगू विपक्षी गठबंधनक एकजुटता बेसी समय धरि नहि टिक सकल। सीएम नितीश कुमारके जेना – तेना भाजपा अपना संग आनयमे सफल भेल। गठबंधनके हिसाबसँ भाजपाक ई एकटा पैघ उपलब्धि कहल जा सकैत अछि। किएक त’ विपक्षी एकजुटताक प्रयास ओना त’ हर दल द्वारा भेल, मुदा जाहि हिसाबेँ सीएम नितीश कुमार प्रयास कएलनि, ओ प्रशंसनीय रहल अछि। ओ नीतीशे कुमार रहथि जे, देशक कोना – कोना जा क’ तमाम विपक्षी पार्टीके एकजुटता पाठ पढ़ौलनि। बहुत हद धरि ओ, अप्पन प्रयासमे सफल सेहो भेलाह आ राजनीति जगतमे ई चर्चा शुरू भेल कि, एहि बेरक चुनावमे भाजपाके कठिन चुनौतीक सामना करए पड़ि सकैत छैक। सीएम नितीश त’ अपना भरि हर तरहक प्रयास कएलनि जे कहूना विपक्षी गठबंधनक आगुआ बनि जाइ, मुदा एहि सभक मध्य हुनकर राजनीतिक इतिहास आ पलटू स्वाभाव, मार्ग अवरोधकक कार्य कएलक। सीएम नितीश कुमार एकटा बहन्नाक खोज में छलाह, जे हुनका कर्पूरी ठाकुरक सम्मानके रूपमे भेटि गेलनि। केंद्र सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री जननेता कर्पूरी ठाकुरकें भारत रत्न देबाक घोषणा कएल गेल, त’ स्वयं सीएम नितीशकुमार प्रधानमंत्री मोदीक प्रशंसा कएलनि। ओना सीएम नितीश अप्पन क्रिया – कलाप आ व्यव्हारसँ ई पहिनहि स्पष्ट करैत रहलथि कि, इंडिया गठबंधन लेल ओ फिट नहि छथि। राजद द्वारा जहन, विपक्षक चेहरा बनएबाक आश्वासन देल गेल छल, मात्र तखनहि, सीएम नितीश राजगसँ संबंधविच्छेद कएने छलाह। मुदा सीएम नीतीशक अत्यधिक प्रयास आ तमाम रणनीतिक बावजूदो हुनका इंडिया गठबंधनमे ओ सम्मान नहि भेटलनि जाहिक ओ अधिकारी छलाह। आब जहन कांग्रेस सनक पैघ दल, कोनो तरहक मोल भाव लेल तैयार नहि छल, जे ई खूब नीकसँ बुझैत छल कि, इंडिया गठबंधनक गठनमे नीतीशकुमारक महत्वपूर्ण योगदान रहल अछि, त’ आन दलसँ केहेन आश ! राजद नेता द्वारा सेहो समय – समय पर कुर्सी छोड़बाक दबाव बनएबाक प्रयास कएल जाइत रहल, स्वयं लालू प्रसाद यादव सेहो बिहारक कुर्सी पर तेजस्वी यादवके देखए चाहैत छलथि, इहो जगजाहिर अछि। त’ की करितथि नीतीशबाबू ? अंततः अप्पन स्वभावानुसार ओ पुनः पलटी मारलनि। सीएम नितीश कतबहू पलटी मारैथ, मुदा तैयो ओ दुनू गठबंधन लेल महत्वपूर्ण बनल रहैत छथि। सीएम नितीशकुमारके विकास पुरुषक संज्ञा देल गेल छल, सुशासन बाबूक नामसँ सेहो प्रसिद्द छथि, बेदाग छवि, ओजस्वी वक्ता आ परिवारवादसँ फराक रहि, अप्पन शर्त पर राजनीति करबाक लेल प्रसिद्द छथि। मुदा पलटब, जे हुनकर स्वाभाव छैन्ह, ताहि हेतु ओ आई धरि कोनो दलक विश्वासपात्र नहि बनि सकलाह। इंडिया गठबंधनक चेहरा बनबाक तमाम गुण रहितो, हुनका गठबंधनमे संदेहक दृष्टिसँ देखल जाइत रहल । सोझ भाषामे कहल जाए त’ सीएम नितीश पर, गठबन्धनमे शामिल कोनो विपक्षी नेताक भरोस कहियो नहि रहल। आ इएह तथ्य, हुनकर राष्ट्रीय राजनीति लेल घातक सिद्ध भेल। अनेको नेता द्वारा कहल गेल अछि कि, सीएम नितीश किनको नहि छथि, ओ कोन गठबंधनमे कहिया धरि रहताह, से कहल नहि जा सकैत अछि। आ ई तमाम गप्प, स्वयं लालू प्रसाद यादव सेहो बुझैत छलाह, मुदा राजनीति त’ संख्याबल आ सम्भावनाक खेल अछि त’ कखनहुँ काल बेमेल गठबंधन सेहो बनि जाइत छैक। सीएम नितीशक पलटी, कोनो आश्चर्यक गप्प नहि, पलटब हुनकर स्वभाव छैन्ह। ओ पहिनहु पलटैत रहल छथि, वर्ष 2013 मे भाजपासँ अप्पन गठबंधन तोड़ि, राजद आ कांग्रेसक संग गेल छलाह। पुनः वर्ष 2017 मे ओ, भाजपाक संग पुरैत, राजगमे शामिल भेल छलाह। तत्पश्चात वर्ष 2019 में भेल लोकसभा चुनाव आ 2020 मे प्रदेशक विधानसभा चुनाव राजगमे रहैत लड़ने छलाह। मुदा अप्पन स्वभावसँ मजबूर अगस्त, 2022 मे नीतीश कुमार पुनः पलटलाह आ भाजपाक नेतृत्ववला गठबंधन राजगसँ संबंध विच्छेद करैत, महागठबंधनमें शामिल भ’मुख्यमंत्री बनल रहलाह। एहि बेर भरिसक ओ, महागठबंधनमे रहितथि, मुदा सीट बंटवारा पर कांग्रेसक ढुलमुल रवैया आ राजद द्वारा हाथ पाछा खिंचब हुनका पुनः सोचबाक लेल विवश कएलक। भाजपा भले जदयू आ सीएम नितीश लेल अप्पन द्वार बंद कएने छल, मुदा खिड़कीसँ गप्पसप्प होइते रहलैक किएक त’ तमाम दबावक बावजूदो, राज्यसभाक उसभापति हरिबंश सिंह पद पर बनल रहलाह। मिला जुला क’ भाजपा, अप्पन प्रयोगमे सफल भेल आ प्रदेशमे एखन पुनः एकबेर भाजपा – जदयूक सरकार अछि। आब आन ठामक त’ जे – जेना, मुदा बिहारमे सभकेँ संग राखब भाजपा लेल सेहो एकटा चुनौती सिद्ध भ’ रहल अछि। भाजपा लेल अप्पन पुरान सहयोगी चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा आओर जीतन राम मांझीके जदयूक संग मिला क’ राखब मोश्किल सिद्ध भ’ रहल अछि। पुरना सहयोगी सभक सेहो अप्पन – अप्पन चिंता छैक, नीतीशके आगमनक पश्चात् आब सीटक बंटवारा एकटा प्रमुख विषय सिद्ध भ’ रहल छैक। सहयोगीक सभक चिंता छैक कि, सीट कहीं कम नहि भ’ जाए, त’ भाजपा लेल सभकेँ बान्हि क’ राखब इंडिया गठबंधनक दृष्टिकोणसँ महत्वपूर्ण अछि। एक दिस भाजपा, नीतीश कुमार आ हुनकर पार्टी जदयूके एनडीएमे मिला, अनेको समस्याक समाधान कएलक अछि त’ दोसर दिस गठबंधनक समक्ष एकटा नव समस्या मुंह बौने ठाढ़ भेल अछि। चिराग पासवानक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) आ जीतन राम मांझीक हिंदुस्तान आवाम मोर्चा किछु बेसिए चिंतित अछि। एहि दुनू दलके नीतीश कुमारक कट्टर विरोधी मानल जाइत छैक। तथापि, भाजपाक शीर्ष नेतृत्व लेल ई कोनो पैघ समस्या नहि अछि, किएक त’ शपथ ग्रहण समारोहमे एनडीएक तमाम घटक दलक नेता शामिल छलाह। ओना, एनडीएमे सीटक बंटवारा लेल गणितीय सूत्र तकबाक पहल सेहो शुरू भ गेल अछि। कहल जा रहल अछि जे भाजपा आ जदयू बड़का घटक अछि। लेकिन, चारि अन्य सहयोगी दलके सेहो सम्मानजनक सीट देबाक तैयारी सेहो कएल जा रहल अछि, जाहिसँ गठबंधन मजबूत बनल रहए। ई तमाम विषय जदयूके अएलाक उपरांते शुरू भेल अछि, नहि त’ पहिने एहेन कोनो प्रश्ने नहि छलैक आ सीट बंटवाराक सूत्र सहजहि बनाओल जा सकैत। भाजपा प्रयासमें अछि कि, गठबंधनक कोनो दल, एहि गठबंधनमे असहज महसूस नहि करए, ताहि हेतु गहन चिंतन – मनन कएल जा रहल अछि। बिहारमे कुल 40 लोकसभा सीट अछि आ अनुमानके मोताबिक, एहिमे सँ भाजपा 17-18 सीट पर चुनाव लड़य चाहैत अछि। जहन कि जदयूके 14 सँ 15 सीट देल जा सकैत अछि। वर्तमानमे भाजपाक 17 सांसद आ जदयूक 16 सांसद अछि। लोजपाक दू गुट चिराग पासवान आओर पशुपति कुमार पारसक पार्टीक सेहो छ’ गोट सांसद छथि। त’ संभव अछि कि, दुनू दलके मध्य सीटक बंटवारा एक समान अनुपातमे राखल जा सकैत अछि। जीतन राम मांझीक पार्टी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा आओर उपेंद्र कुशवाहाक पार्टी रालोजपाके सेहो एनडीएमे शामिल कएल गेल अछि, त’ तीन – चारि सीट हुनका सभ लेल सेहो रखबाक छैक। कहबाक तात्पर्य ई जे चुनौती कतबहू पैघ होय, मुदा भाजपाक शीर्ष नेतृत्व प्रयासमे छथि कि सभकेँ एकजुट राखल जाए। मुदा बीच – बीच में दबावक राजनीती सेहो देखल जाइत अछि, किएक त’ प्रदेशमे भेल राजनीतिक घमासानक उपरांत नव सरकारक गठन त’ भ’ गेल अछि, मुदा मंत्री पद आ विभागक बटवारा पर खूब माथापच्ची चलि रहल अछि। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चाक एक गोट मंत्री बनाओल गेल अछि, जहन कि, मांझी दू गोट मंत्री पद लेल दबाव बनएबाक प्रयास करैत बयानबाजीमें व्यस्त छथि। कहूना बिहार सरकारमे मंत्रालयक बंटवारा संपन्न भेल, भाजपाक तमाम प्रयास बावजूदो सीएम नीतीश कुमार, गृह आ सामान्य प्रशासन विभाग अपनहि लग रखलनि। मार्ग कतबहू कठिन किएक नहि होय, मुदा भाजपा लेल ई तमाम विघ्न बाधा सामान्य गप्प अछि, किएक त’ एहि तरहक राजनीतिमें भाजपा सिद्धहस्त अछि। त’ अनुमान लगाओल जा रहल अछि कि, शीघ्रहि एहि तमाम विन्दु पर एकटा ठोस रणनीति बनाओल जाएत। विपक्षी गठबंधन इंडिया पर एखनहु संशय बनल अछि मुदा, भाजपा लग अनेको विकल्प मौजूद छैक त’ एहि सभसँ पार पायब भाजपा लेल कोनो पैघ गप्प नहि।

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