दीपक प्रकाशक नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्टसख्त, कहलक बिना एमएलए/एमएलसीक मंत्रीपद कोना ?
नई दिल्ली । समदिया

बिहार सरकारक पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाशक नियुक्तिकेँ चुनौती देल गेल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त रुख अपनौने अछि। सर्वोच्च अदालत राज्य सरकारसँ पूछने अछि जे आखिर कोनो व्यक्ति विधायक अथवा विधान परिषदक सदस्य नहि रहितो मंत्री पद पर कोना बनल रहि सकैत छथि ?
याचिकाकर्ताक वकीलक अदालतमे दलील रहल जे दीपक प्रकाश नहिं विधानसभा सदस्य छथि आ ने विधान परिषदक। संविधानक अनुसार गैर-विधायककेँ मंत्री बनेबाक बाद अधिकतम छह महीनाक भीतर विधानसभा अथवा विधान परिषदक सदस्य बनब अनिवार्य होइत अछि। हुनकर कहब छल जे ई संवैधानिक छूट केवल एक बेरक लेल होइत अछि, मुदा दीपक प्रकाश ई समयसीमा पार कऽ चुकल छथि।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई)क अध्यक्षतामे गठित पीठ एहि मामिलाक सुनवाई मंगलकेँ करत। सुनवाईक दौरान बिहार सरकार कहलनि जे ओ सर्वोच्च अदालतक निर्णयक पालन करत। एहि पर प्रधान न्यायाधीश कहलनि जे ई पूर्ण रूपेँ कानूनसँ जुड़ल प्रश्न अछि। राज्य सरकारकेँ स्पष्ट करए पड़त जे कोनो व्यक्ति विधायक अथवा विधान परिषदक सदस्य बनने बिना छह महीनासँ बेसी समय धरि मंत्री पद पर कोना रहि सकैत छथि। अदालत एहि विषयमे राज्य सरकारसँ विस्तृत जवाब मांगत।
दरअसल, दीपक प्रकाश पहिल बेर 20 नवम्बर 2025 केँ मंत्री बनाओल गेल छलाह। ओहि समय ओ विधानसभा अथवा विधान परिषद—दूनूमे सँ कोनो सदनक सदस्य नहि छलाह। संविधानक अनुसार छह महीनाक भीतर हुनका कोनो एकटा सदनक सदस्य बनब आवश्यक छल।
मुदा एहि बीच 14 अप्रैल 2026 केँ तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपन पदसँ इस्तीफा देलनि, जाहिसँ पूरा मंत्रिमंडल स्वतः भंग भऽ गेल।
एकर बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनलाक बाद 7 मई 2026 केँ मंत्रिमंडलक विस्तार भेल आ दीपक प्रकाशकेँ फेर मंत्री बनाओल गेल। मुदा एहि बेर सेहो ओ कोनो सदनक सदस्य नहि छथि।
दीपक प्रकाशक पक्षक तर्क अछि जे छह महीनाक संवैधानिक अवधि 7 मई 2026 सँ गिनल जाए। जखनिकि कानूनी विशेषज्ञ सभक मत अछि जे समयसीमाक गणना 20 नवम्बर 2025 सँ मानल जाएबाक चाही। एहि संवैधानिक विवादकेँ लऽ कऽ सुप्रीम कोर्टमे याचिका दायर कएल गेल अछि।
