मनुस्मृतिक उल्लेख पर राज्यसभामे हंगामा, शिक्षाकेँ कारोबार बनेबाक आरोप
नई दिल्ली । समदिया

राज्यसभामे लोक परीक्षा (अनुचित साधनक रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चाक दौरान विपक्षक नेता मल्लिकार्जुन खड़गे केन्द्र सरकारक शिक्षा नीति पर तीक्षण प्रहार कएलनि। हुनकर आरोप छल जे सरकारक नीतिक कारण शिक्षा एकटा पैघ कारोबार बनि गेल अछि, जाहिसँ सभसँ बेसी नुकसान गरीब परिवारक बच्चा सभकेँ भोगय पड़ि रहल अछि।
खड़गे मनुस्मृतिक उल्लेख करैत कहलनि जे पहिने शिक्षा व्यवस्थामे वंचित वर्गक लोकसभक संग भेदभाव होइत छल। मनुस्मृतिक नाम लेलाक बाद सत्ता पक्षक सदस्य सभ एकर कड़गड़ विरोध कएलनि, जाहिसँ सदनमे हंगामा शुरू भऽ गेल।
खड़गेक एहि वक्तव्य पर सदनक नेता जेपी नड्डा कहलनि, “विपक्षक नेता मल्लिकार्जुन खड़गे जे बात कहलनि, ताहिसँ समाजमे द्वेष आ अशांतिक वातावरण बनबाक आशंका अछि। हम सभ एहि सदनक जिम्मेदार सदस्य छी। हमर जानकारीक अनुसार हुनकर बात तथ्यसँ मेल नहि खाइत अछि।”
खड़गे कहलनि जे शिक्षा आब एकटा पैघ कारोबार बनि गेल अछि। निजी शिक्षण संस्थानक संख्या लगातार बढ़ि रहल अछि, जाहिसँ गरीब परिवारक छात्र सभ सभसँ बेसी प्रभावित भऽ रहल छथि। हुनकर अनुसार देशमे 70 हजारसँ बेसी उच्च शिक्षा संस्थान अछि, जाहिमे लगभग 4 करोड़ 50 लाख छात्र अध्ययन कऽ रहल छथि, मुदा अनुसूचित जाति आ अनुसूचित जनजातिक छात्रक नामांकन एखनहुँ राष्ट्रीय औसतसँ कम अछि।
हुनका अनुसार दिव्यांग छात्रक भागीदारी मात्र 0.12 प्रतिशत अछि। खड़गे कहलनि जे ई स्थिति ओहि सोचक प्रतीक अछि, जाहिमे शिक्षा सभक अधिकार नहि, बल्कि किछु लोकक विशेषाधिकार मानल जाइत अछि। हुनकर आरोप छल जे सरकारक नीति बेर-बेर ओहि मनुवादी सोचक याद दियाबैत अछि, जाहिक उल्लेख मनुस्मृतिमे भेटैत अछि।
आगू खड़गे कहलनि जे ओ मनुस्मृतिक एकटा श्लोक पढ़य चाहैत छथि, मुदा संस्कृत ठीकसँ नहि पढ़ि सकबाक कारण ओकर हिन्दी अनुवाद पढ़ताह। जखनि ओ एकर उल्लेख शुरू कएलनि, तखनि सत्ता पक्षक सदस्य सभ जोरदार विरोध करय लगलाह आ सदनमे शोर-शराबा शुरू भऽ गेल।
हंगामाक बीच सभापति हस्तक्षेप करैत कहलनि जे जँ कोनो सदस्यकेँ आपत्ति अछि तँ ओकर विचार कएल जाएत, मुदा भाषण विचाराधीन विधेयक धरि सीमित राखल जाए। ओ खड़गेसँ शीघ्र अपन भाषण समाप्त करबाक आग्रह सेहो कएलनि।
खड़गे फेर कहलनि जे ओ अपन भाषणमे शिक्षकक संख्या, पाठ्यक्रम आ शिक्षा व्यवस्थासँ जुड़ल अनेक तथ्य प्रस्तुत कएने छथि। हुनकर कहब छल जे सरकार समान आ न्यायपूर्ण शिक्षा, विश्वविद्यालयमे योग्य शिक्षक आ कुलपति नियुक्तिक बात तँ करैत अछि, मुदा पाठ्यक्रममे जे विषय सभ जोड़ल जा रहल अछि, से चिंताक विषय अछि। एहिपर जखनि ओ मनुस्मृतिक एकटा कथित अंशक उल्लेख करय लगलाह, तखनि सत्ता पक्ष फेर विरोध जतौलक। लगातार हंगामाक बीच सभापति दोबारा हस्तक्षेप करैत हुनका विधेयकसँ संबंधित विषय पर सीमित रहबाक निर्देश देलनि।
मनुस्मृतिक उल्लेख पर सदनमे तीक्षण नोकझोंक सेहो देखय लेल भेटल। जवाबमे जेपी नड्डा कहलनि जे एहेन वक्तव्यसँ समाजमे द्वेष आ अशांतिक भावना पसरैत अछि। हुनकर कहब छल जे मनुस्मृतिक मूल पाठक प्रमाणिकता सुनिश्चित भेनाइ जरूरी अछि। जे पुस्तकक उल्लेख कएल गेल अछि, से मूल पाठ नहि अछि। पहिने ई प्रमाणित होबय जे ओ प्रामाणिक अछि।
नड्डा सभापतिसँ आग्रह कएलनि जे मनुस्मृतिक संबंधमे कहल गेल बात सभकेँ सदनक कार्यवाहीक हिस्सा नहि बनाओल जाए।
