राग-रंग

नहिं रहलीह दिग्गज शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रे

नई दिल्ली

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सङ्गीत उद्योगमे एक बेर फेर शोकक लहर अछि किएक तँ म्यूजिक इंडस्ट्री प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रेकेँ गमा देलक अछि। प्रख्यात शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रेक संक्षिप्त बीमारीक बाद शनिदिन पुणेक एकटा निजी अस्पतालमे निधन भऽ गेल। ९१ वर्षीय प्रभा सांस लेबामे किछु समस्याक शिकायत कयने छलीह मुदा कथित रूपसँ आइ भोरमे एकटा निजी अस्पताल लऽ जाइत काल हृदयाघातसँ हुनकर मृत्यु भऽ गेलनि।

हुनका भारत सरकार द्वारा तीनू प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारसँ सम्मानित कयल गेल अछि, जाहिमे १९९०मे पद्मश्री, २००२मे पद्म भूषण आ २०२२मे पद्म भूषण सम्मिलित अछि। एकर अतिरिक्त, दिग्गज गायककेँ संगीत साधना सहित कतेको अन्य राष्ट्रीय आ अंतर्राष्ट्रीय सम्मान भेटल अछि। रत्न पुरस्कार, हाफिज अली खान पुरस्कार आ ग्लोबल एक्शन क्लब इंटरनेशनल द्वारा अभिनंदन सहित कतेको अन्य पुरस्कार सेहो छल। प्रभा किराना घराना सङ्गीत विद्यालयक प्रतिपादक छलीह।

ओ ख्याल, ठुमरी, गजल, दादरी, भजन आ नाट्य सङ्गीतक प्रस्तुतिमे उत्कृष्टता प्राप्त कयने छलीह। प्रभा स्वरांगिनी आ स्वरंजनी सन सङ्गीत रचना पर पोथी सेहो लिखने छलीह।

प्रभा स्वर नामक कविताक पोथी सेहो लिखलनि

एतबहि नहिं, हुनका अपूर्व कल्याण, मधुर कौंस, दरबारी कौंस, पटदीप-मल्हार, शिव काली, तिलंग-भैरव आ रवि भैरव सन नव रागक आविष्कार करबाक श्रेय देल जाइत अछि। ओ नृत्य प्रभाक लेल सङ्गीत रचना कयलनि, जे नीदरलैंडक एकटा शीर्ष कलाकार द्वारा जैजक लेल रूपान्तरित एकटा पूर्ण-लम्बाई नृत्य गायन छल, आ सङ्गीत नाटक वा सङ्गीतिकाक लेल सङ्गीत सेहो तैयार कयलनि। ओ स्वर नामक कविताक एकटा पुस्तक सेहो लिखने छथि, जे हिन्दी, मराठी आ अङ्ग्रेजीमे प्रकाशित भेल छल। ओ आकाशवाणीमे पूर्व सहायक निर्माता सेहो रहि चुकल छथि।

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