पटनाक नाम परिवर्तनक मांग, उपेन्द्र कुशवाहा कहलनि—‘पाटलिपुत्र’ हमर गौरवक प्रतीक
पटना । समदिया

राज्यसभा सांसद आ राष्ट्रीय लोक मोर्चाक राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा पटना शहरक नाम बदलि फेर पाटलिपुत्र करबाक मांग राज्यसभामे उठौलनि। ओ कहलनि जे पाटलिपुत्र नाम बिहारक गौरवशाली इतिहास आ विरासतसँ जुड़ल अछि। हुनकर अनुसार, ई मात्र नाम परिवर्तनक विषय नहि, बल्कि अपन ऐतिहासिक विरासतकेँ सम्मान देबाक विषय अछि।
केरलमक उदाहरण दैत उठौलनि पाटलिपुत्रक मांग
राज्यसभामे चर्चाक दौरान उपेन्द्र कुशवाहा कहलनि जे केरल राज्यक नाम ‘केरलम’ करबाक प्रक्रिया आगू बढ़ल अछि। केरलवासीक भावना आ अधिकारक अनुरूप नाम परिवर्तनक बात स्वीकार कएल गेल अछि। तहिना बिहारक लोकक सेहो एकटा पुरान भावना अछि जे वर्तमान पटना शहरक नाम फेर पाटलिपुत्र राखल जाए।
कुशवाहा कहलनि जे इतिहासमे बिहारक स्वर्णिम काल भारतक इतिहासक महत्वपूर्ण हिस्सा रहल अछि। प्राचीन कालमे वर्तमान पटना पाटलिपुत्र नामसँ प्रसिद्ध छल आ ई तत्कालीन साम्राज्यक राजधानी रहल। हुनका अनुसार, पाटलिपुत्रक ऐतिहासिक महत्व बिहारक गौरवसँ गहींर रूपसँ जुड़ल अछि।
‘दिल्ली आ बिहारमे हमर गठबंधनक सरकार’
उपेन्द्र कुशवाहा राज्यसभामे भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डाक बिहारसँ जुड़ावक उल्लेख करैत कहलनि जे बिहारक गौरवक बात सुनि हुनको गर्वक अनुभूति होइत होयत। ओ कहलनि जे वर्तमानमे दिल्ली आ बिहार दुनूमे गठबंधनक सरकार अछि, तें पटना नाम बदलि पाटलिपुत्र करबाक दिशामे आगू बढ़बामे कोनो कठिनाई नहि हेबाक चाही।
ओ स्पष्ट रूपसँ मांग रखलनि जे पटना नाम बदलि पाटलिपुत्र कएल जाए।
बिहारमे 11 टाउनशिपक नाम पाटलिपुत्र करबाक चर्चा
एहि बीच बिहारक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राज्यमे प्रस्तावित 11 नव टाउनशिपक नाम पाटलिपुत्र रखबाक बात कहलनि अछि। एहि पृष्ठभूमिमे पटना शहरक नाम पाटलिपुत्र करबाक उपेन्द्र कुशवाहाक मांग राजनीतिक आ सामाजिक स्तरपर सेहो चर्चामे आबि गेल अछि।
शहरक नाम बदलबाक प्रक्रिया की ?
कोनो शहरक नाम बदलबाक प्रक्रिया सामान्यतः राज्य सरकारसँ शुरू होइत अछि। राज्य सरकार विधानसभामे प्रस्ताव पारित करैत अछि। एकरा बाद केन्द्र सरकारक संबंधित विभागसँ आवश्यक अनापत्ति आ मंजूरीक प्रक्रिया होइत अछि।
केन्द्रीय स्तरपर प्रक्रिया आगू बढ़लाक बाद रेल मंत्रालय, डाक विभाग, इंटेलिजेंस ब्यूरो आ सर्वे ऑफ इंडिया जेकाँ संबंधित संस्थासँ सेहो राय अथवा मंजूरी लेल जा सकैत अछि। सभ प्रक्रिया पूरा भेलाक बाद केन्द्र सरकारक अधिसूचनाक माध्यमसँ नाम परिवर्तन आधिकारिक रूपसँ लागू होइत अछि।
पाटलिपुत्र नामक पुनर्स्थापनाक मांग आब बिहारक ऐतिहासिक अस्मिता, गौरव आ विरासतसँ जुड़ल एकटा महत्वपूर्ण विमर्श बनि गेल अछि।
