महिला आरक्षण बिल पर विपक्षक सांसदसभ उठौलनि सरकारक नियत पर प्रश्न, कहलनि – पहिने जनगणना कराउ, फेर परिसीमन
नई दिल्ली । समदिया

नारी वंदन शक्ति अधिनियम आर प्रस्तावित परिसीमनकेँ ल’ क’ संसदक भीतर आ बाहर राजनीतिक घमासान तेज भ’ गेल अछि। एक दिसि जखनि सत्ता पक्ष एकरा ऐतिहासिक कदम कहि रहल अछि, ओतहग विपक्ष समय, प्रक्रिया आ प्रावधान सभ पर गंभीर सवाल उठौलक अछि। सपा सांसद डिंपल यादव नारी वंदन शक्ति अधिनियमकेँ ल’ क’ कहलन्हि, “सरकारक नियत पर प्रश्नचिन्ह अछि कारण जखनि ई बिल पास भेल छल त’ कहल गेल छल जे पहिने जनगणना कराउ आर फेर परिसीमन होयत आ ओकर आधार पर महिलासभक लेल क्षेत्र बना सकब, मुदा पहिनेसँ पायदानकेँ नजरअंदाज क’ देल गेल अछि। जाहि स्वरूपमे ई बिल आनल जएबाक चाहैत छल, ओहि स्वरूपमे नइँ आनल जा रहल अछि बल्कि मोनमुताबिक तरहेँ आनल जा रहल अछि। हमर मांग अछि जे हमर पिछड़ल वर्गक महिलासभकेँ सेहो आरक्षण भेटय।”
प्रस्तावित परिसीमन बिल पर ओ कहलन्हि, “कतौह ने कतौह जे छोट प्रदेश अछि, दक्षिण भारतक राज्य अछि, ओकर वर्चस्व घटत, एकर जे भूमिका सरकार बनेबामे वा अपन राज्यसभमे फंड पहुँचेबाक अछि, कतौह ने कतौह तकरो क्षति पहुँचत।”
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी नारी वंदन शक्ति अधिनियम पर कहलीह, “किछु चीजक विरोध नै बल्कि सरेआम देशमे घोटाला चलि रहल अछि। इएह लोकसभ महिला सभक दुरुपयोग करैत छथि। महिलाक नाम पर ओ एहि तरह देखबैत छथि जे हमरा पर मेहरबानी करि रहल छी। ओ नाटक करि रहल छथि। ई गैर संवैधानिक अछि।”
ओ कहली जे भाजपा आदतिसँ मजबूर अछि, जतबा महिला सभ आजुक दिन संसदमे छथि, हुनकासँ बातचीत नै भेल। ने ककरो बजाओल गेल, ने कोनो तरहक बहस भेल। एहि समय पाँच राज्यमे चुनाव चलि रहल अछि आ ई बिल पास कएल जा रहल अछि। ओतय रहैत महिला सभ एतय आबियो नै सकैत छथि। एहेन जल्दबाजी किएक अछि ?
महिला आरक्षण बिल पर जेएमएम सांसद महुआ मांझी कहलीह, “हम सभ विपक्षी पार्टी सभ एहि बिलक समर्थन करैत छी। ई एकटा ऐतिहासिक दिन अछि, मुदा समय केर लऽ कऽ विपक्षी सांसद सभक बीच सवाल अछि। एखनि दूटा राज्यमे चुनाव अछि, सांसद चुनावमे व्यस्त छथि। एखनि ई बिल लागू नै होयत। एखनि बिल पास भऽ सेहो जायत तँ परिसीमनक बाद लागू होयत। एकरा मानसून सत्रमे सेहो आनल जा सकैत छल। एहिसँ पहिने हम विपक्षी पार्टी सभक बैठकक मांग कएने छलौंह मुदा एहेन किछु नै भेल। हड़बड़ीमे एकरा अनलासँ लागैत अछि कि चुनावमे एकर लाभ लेबय लेल ई कयल जा रहल अछि।”
सीपीआई (एम) केर वृंदा करात कहलनि, “हमर मांग अछि कि महिलाक आरक्षणकेँ परिसीमनसँ अलग कयल जाए आ परिसीमन मौजूदा जनगणनाक आधार पर होए, नहिं कि पुरना जनगणनाक आधार पर। संगहि महिला सभक आरक्षण २०१० केर बिलक अनुसार लागू कयल जाए। हमर इएह मांग अछि।”
