राजनीति

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लोकतंत्रकेँ आओर मजबूत करत, संविधानक मूल संरचना पर कोनो असर नहि पड़त : जेपीसी अध्यक्ष

लखनऊ।  समदिया

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’सँ संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयकक जांच लेल गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) केर तीन दिनक बैसार बुधदिन लखनऊमे समाप्त भ गेल। समितिक अध्यक्ष आ सांसद पीपी चौधरी कहलनि कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केर दूरदर्शी दृष्टिकोणक हिस्सा अछि, जकर उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्थाक बेसी प्रभावी, पारदर्शी आ राष्ट्रहितक संग तालमेल बनेनाइ अछि। संयुक्त संसदीय समिति एही बातक पुष्टि कयलक जे इ व्यवस्था संविधान वा संघीय व्यवस्थाक मूल संरचनाक उल्लंघन नहि  करैत अछि। बैसारक बाद पत्रकार सम्मेलनकेँ संबोधित करैत चौधरी कहलनि, लोकसभा आ विधान सभाक चुनाव एक संग 1952 सँ 1967 धरि भेल, मुदा बादमे विभिन्न कारणसँ व्यवस्था बदलल गेल। ओ बतौलनि जे 1968मे किछु राज्यमे राष्ट्रपति शासन आ राज्य पुनर्गठनसँ चुनावी चक्र बाधित भ गेल छल, जखन कि आपातकालमे लोकसभाक कार्यकाल बढ़लासँ लोकसभा आ विधानसभा चुनाव एक संग करबाक प्रथा समाप्त भ गेल। ओ आगू कहलनि जे वर्ष 1983मे निर्वाचन आयोग, वर्ष 2002 केर एक समिति, वर्ष 2015 केर संसदीय समिति, वर्ष 2018मे नीति आयोग आ वर्ष 2023मे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंदक अध्यक्षता वला उच्चस्तरीय समिति शामिल अछि।

जेपीसी अध्यक्ष स्पष्ट केलथि जे ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विशेष रूपसँ लोकसभा आ विधानसभा चुनाव एक संग आयोजित करयसँ कहल जाइत अछि आ संविधानक मूल संरचना पर कोनो असर नहि पड़त। हुनक दावा छल कि एही व्यवस्थासँ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाकेँ लगभग ₹7 लाख करोड़क फायदा भ सकय अछि। ओ एही बातक दिस इशारा कयलनि कि बेर-बेर  चुनावक वजहसँ प्रशासनिक संसाधन पर तनाव पड़ैत अछि, विकासक काजमे बाधा आबैत अछि आ औद्योगिक गतिविधी पर असर पड़ैत अछि, कारण पैघ संख्यामे मजदूर अपन गृह राज्यमे वापस आबैत अछि।

ओ उल्लेख कयलनि जे संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न राज्यमे जा कय सभ सरोकारवालाक सुझाव जुटा रहल अछि। जँ संसदसँ संबंधित विधेयक पारित भ गेल तँ 2029 सँ शुरू भ रहल लोकसभा चुनावक संग-संग कतेको राज्यमे विधानसभा चुनाव चरणबद्ध तरीकासँ भ सकैत अछि। एहिमे इहो कहल गेल जे सरकारक स्थिरता सुनिश्चित करबा लेल ‘रचनात्मक विश्वास मत’ जँका प्रावधान पर विचार भ रहल अछि। तीन दिवसीय बैसारक अंतिम दिन समिति राज्यक विभिन्न विश्वविद्यालय आ उच्च शिक्षा संस्थानक कुलपति आ निदेशकक संग-संग कानून आ राजनीति विज्ञानकेँ विशेषज्ञ आ अन्य शिक्षाविदक संग विस्तृत चर्चा कयलक।

बैसारक दौरान कतेको संस्थानक प्रतिनिधि, जाहिमे डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान आ इलाहाबाद विश्वविद्यालय शामिल छल, जे अपन सुझाव देलनि। चर्चामे केन्द्र-राज्य संबंध, मध्यावधि चुनाव, शेष कार्यकाल, निर्वाचन आयोगक भूमिका, निर्वाचन प्रक्रियाकेँ स्थिरता आ प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन केर प्रशासनिक आ कानूनी पहलू सहित बहुत रास विषय शामिल छल।

समितिक सदस्य सभ विभिन्न बिन्दु पर विशेषज्ञ सभसँ स्पष्टीकरण सेहो मंगलक। विशेषज्ञ सभकेँ बादक चरणमे किछु खास विषय पर लिखित सुझाव देबय केर अनुमति छल। एकर बाद समिति पद्म पुरस्कृत, नागरिक समाजक प्रतिनिधि आ मीडिया केर सदस्यसँ बातचीत कयलनि। समितिक अनुसार, प्राप्त सुझाव आओर विचार पर विचार कयलाक बाद ओ अपन रिपोर्ट तैयार करत।

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