जनगणनामे मैथिली लिखाबय लेल समवेत अभियान तेज करबाक आह्वान

मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक दसम ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चामे विशेषज्ञ लोकनिक सुझाव; घर-घर मैथिली, प्राथमिक शिक्षामे मातृभाषा आ व्यापक जनजागरण पर बल
निज समदिया!! मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चाक दसम कड़ीमे “जनगणनामे मैथिली हेतु मिथिलावासीक समवेत प्रयास” विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श भेल। शुक्र, ३१ अगस्तक कार्यक्रममे प्रस्तोता धर्मेन्द्र कुमार झा, संयोजक मणिकांत झा, +2 शिक्षिका एवं लोकगायिका डॉ. सुषमा झा एवं मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक प्रधान सम्पादक पं. अजयनाथ झा शास्त्री सहित अनेक विद्वान अपन विचार रखलनि।
कार्यक्रमक आरम्भमे प्रस्तोता धर्मेन्द्र कुमार झा सहभागी लोकनिक स्वागत करैत कहलनि जे जनगणनामे मैथिलीक वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करब, प्राथमिक स्तर पर मैथिली माध्यमसँ पढ़ौनी आरम्भ करब तथा मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा दियेबाक दिशामे जनजागरण समयक आवश्यकता अछि। एहि उद्देश्यसँ मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश द्वारा निरन्तर अभियान चलाओल जा रहल अछि।
आकाशवाणी दरभंगाक उद्घोषक, साहित्यकार ओ चर्चित गीतकार सामाजिक पुरोधा संयोजक मणिकांत झा अपन अनुभव साझा करैत कहलनि जे मिथिलामे प्रतिभाक कमी नहि अछि, आवश्यकता केवल साझा उद्देश्य पर एकजुट भऽ काज करबाक अछि। हुनक अनुसार जनगणनामे मातृभाषाक प्रश्नक उत्तरमे “मैथिली” लिखब प्रत्येक मैथिलक नैतिक दायित्व अछि। ओ कहलनि जे जँ समाज एकस्वर होएत तँ मैथिलीकेँ अवश्य उचित सम्मान भेटत।
प्लस 2 शिक्षिका डॉ. सुषमा झा अपन विचार व्यक्त करैत कहलनि जे मैथिली मिथिलाक संवैधानिक भाषा होइतहुँ सरकारी उपेक्षाक कारण अपेक्षित सम्मानसँ वंचित रहल अछि। हुनक अनुसार भाषा संरक्षणक जिम्मेदारी केवल सरकारक नहि, बल्कि प्रत्येक मैथिलक सेहो अछि। ओ कहलनि जे परिवारमे बाल-बच्चासँ मैथिलीमे संवाद करब भाषा संरक्षणक प्रथम सोपान अछि। नव पीढ़ी अन्य भाषा अवश्य सीखए, मुदा मातृभाषासँ जुड़ल रहब सेहो आवश्यक अछि। डॉ. झा आगू कहलनि जे मैथिलीकेँ कोनो वर्ग, क्षेत्र अथवा उपबोलीक आधार पर विभाजित करबाक प्रयास उचित नहि अछि। जनगणनामे प्रत्येक मिथिलावासी अपन मातृभाषाक रूपमे मैथिली लिखाबथि, एहि लेल व्यापक जनजागरण आवश्यक अछि। ओ सामाजिक माध्यम, गीत, रील्स आ लेखकेँ सेहो जागरूकताक प्रभावी माध्यम बतौलनि। एहि अवसर पर हुनका द्वारा मणिकांत झा रचित दूटा गीतक प्रस्तुति सेहो देल गेल।
मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक प्रधान सम्पादक पं. अजयनाथ झा शास्त्री सहभागी लोकनिक विचारक सराहना करैत जनगणनामे मैथिली विषयक अपन दूटा रचनाक वीडियो सेहो साझा कएलनि। ओ स्पष्ट कहलनि जे ई अभियान कोनो व्यक्ति विशेषक नहि, बल्कि सम्पूर्ण मिथिलाक अभियान अछि। हुनक अनुसार प्रत्येक सामाजिक संस्था, सांस्कृतिक संगठन आ जागरूक नागरिककेँ एहि अभियानमे सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करबाक आवश्यकता अछि।
पं. शास्त्री प्राथमिक स्तर पर मैथिली माध्यममे शिक्षाक व्यवस्था लागू करबाक माँग दोहरबैत सरकारक इच्छाशक्तिपर प्रश्न उठौलनि। हुनक कथन छल जे नवीन शिक्षा नीतिक अनुरूप राज्यक सभ मैथिलीभाषी जिलामे मातृभाषामे पढ़ौनी प्रारम्भ होए तखनहि सरकारक भाषा-प्रतिबद्धता स्पष्ट मानल जाएत। ओ कहलनि जे मैथिलीक अधिकार लेल समाजकेँ बारम्बार संघर्ष करय पड़ि रहल अछि, जखनि कि ई संवैधानिक रूपसँ मान्यता प्राप्त भाषा अछि।
चर्चाक क्रममे डॉ. सुषमा झा सेहो मैथिलीकेँ विभाजित करबाक प्रयास पर चिन्ता व्यक्त करैत कहलनि जे एकजुट समाज एहि प्रकारक प्रयासकेँ सफल नहि होमय देत। कार्यक्रममे सहभागी सभ एकमतसँ कहलनि जे जनगणनामे प्रत्येक मैथिल अपन मातृभाषाक रूपमे मैथिली लिखाबथि, ताहिसँ भाषाक वास्तविक जनसंख्या प्रतिबिम्बित होएत आ भविष्यक नीति निर्माणमे सेहो लाभ भेटत।
चर्चा-परिचर्चाक समापनमे निर्णय लेल गेल जे गाम-गाम जागरूकता अभियान चलाओल जाए, सरकारी पत्राचार आ राजकीय कार्यमे मैथिलीक प्रयोगकेँ प्रोत्साहित कएल जाए तथा प्रत्येक नागरिक अपन स्तरसँ मातृभाषाक सम्मान बढ़ेबामे योगदान दिअए। प्रस्तोता धर्मेन्द्र कुमार झा सभ सहभागी आ दर्शकवृन्दक प्रति आभार व्यक्त करैत कहलनि जे मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश आगाँ सेहो एहि प्रकारक विचारगोष्ठीक माध्यमसँ समाजकेँ भाषा, संस्कृति आ मिथिलाक समसामयिक विषयसभ पर जागरूक करैत रहत।
