प्रशासन

ऑपरेशन सिंदूरक वर्षगांठ पर विदेश मंत्रालय कहलक “आतंकवाद पर भारत नहि झुकत’

नई दिल्ली। समदिया

ऑपरेशन सिंदूरक पहिल वर्षगांठ पर भारत एक बेर फेर आतंकवादक मुद्दा पर पाकिस्तानकेँ कड़ा संदेश देलक। विदेश मंत्रालय (एमईए) साफ तौर पर कहलक कि पूरा दुनिया केर पता अछि कि सीमा पारसँ आतंकवाद बहुत दिनसँ पाकिस्तान केर राज्य नीतिक हिस्सा रहल अछि। भारत ईहो दोहरौलक जे ओकरा अपन सुरक्षा लेल आतंकवादकेँ जवाब दबाक अधिकार अछि।

एमईए केर प्रवक्ता रणधीर जायसवाल बृहस्पतिदिन कहलनि जे, पहलगाम आतंकी हमला केर पूरा दुनिया देखलक आ बुझि गेल जे सीमा पार आतंकवादकेँ कोना बढ़ावा देल जाइत अछि। ओ कहलनि कि भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद केर उचित जवाब देलक अछि आ भविष्यमे सेहो आतंकवादक खिलाफ वैश्विक लड़ाई केर मजबूत करय लेल काज करत।

एमईए कहलक कि भारतकेँ अपन सुरक्षा आ नागरिकक सुरक्षा लेल सभ आवश्यक कदम उठाबय केर अधिकार सुरक्षित अछि। बयानमे कहल गेल अछि कि आतंकवादक खिलाफ भारतक नीति साफ अछि आ देश कोनो तरहक आतंकी गतिविधि बर्दाश्त नहि करत। रणधीर जायसवाल कहलक कि भारत आतंकवादक खिलाफ वैश्विक लड़ाई केर मजबूत करय लेल प्रतिबद्ध अछि। दुनिया अब समझि गेल अछि कि सीमा पारसँ आतंकवाद क्षेत्रीय शांति आ सुरक्षा लेल कोना खतरा पैदा करैत अछि।

विदेश मंत्रालय पहलगाम आतंकी हमलाक जिक्र करैत कहलनि कि एही घटनासँ एक बेर फेर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादक वास्तविकताकेँ दुनियाक सामने उजागर कयल गेल। भारत ओहि समय कड़ा कार्यवाही कयने छल आ आतंकवादक खिलाफ अपन रुख स्पष्ट कयने छल।

भारत सिंधु जल संधि पर सेहो अपन रुख दोहरौलनि। एमईए कहलक कि सीमा पारसँ आतंकवादकेँ पाकिस्तानक समर्थनक कारणे अखनि ई संधि निलंबित अछि। भारत स्पष्ट कयलक कि जा धरि पाकिस्तान आतंकवादक समर्थन पूरा तरहेँ आ स्थायी रूपसँ बंद नहि करत ता धरि एही मुद्दा पर ओकर स्थिति अपरिवर्तित रहत।

एकटा सवालक जवाब दैत विदेश मंत्रालयक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल कहलनि जे एहि साल भारत ब्रिक्सक अध्यक्षता कय रहल अछि आ एहि कार्यक्रमक तहत विदेश मंत्रीक बैसार सहित कतेको महत्वपूर्ण आयोजन होएत। ओ स्पष्ट कयलनि जे बैसारक तिथि आ अन्य औपचारिक विवरण समय पर घोषित कयल जायत, जकर बाद पूरा जानकारी साझा कयल जायत।

लिपुलेख मार्गक संबंधमे नेपालक बयानक संबंधमे विदेश मंत्रालय स्पष्ट कयलक जे कैलाश मनसरोवर यात्रा एहि मार्गसँ 1954 सँ भ रहल अछि आ इ कोनो नव व्यवस्था नहि अछि। भारत कहलक कि एही मुद्दा पर अनावश्यक विवाद नहि पैदा कयल जाय, कारण इ एगो पुरान आ स्थापित धार्मिक तीर्थ मार्ग अछि।

Spread the love