मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चाक प्रथम एपिसोड भेल सफलतापूर्वक संपन्न

सब प्रकारक अहंकार सँ ऊपर उठि कs समवेत प्रयास बहुत जरूरी अछि। अपन राज्य नहिं भेने छोट-छोट अधिकारक लेल राज्य सरकारक अनुसंशाक बेगड़ता पड़ैत अछि। मातृभाषामे शुद्ध-अशुद्ध नहिं देखल जाइत छैक, से अन्य भाषामे देखल जाइत छैक, सुन्दरता कनियाक देखल जाइत छैक, मायक नहिं, माय तऽ माय छैक, सदा सब स्थितिमे पूज्यनीयां” — डॉ. अशोक अविचल
निज समदिया!! मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश मिथिला-मैथिलीक समस्या सभक समाधानक लेल नित नवीन उपाय करय केर प्रयास करैत आबि रहल अछि। एहि क्रममे रवि, १७-०५-२०२६ सँ ऑनलाइन चर्चा – परिचर्चा शुरू करैत प्रथम एपिसोड सफलतापूर्वक संपन्न कयलक। ई चर्चा-परिचर्चा सायं ६:०० बजेसँ ०७:३० बजे धरि भेलै आ एकर सीधा लाइव प्रसारण फेसबुकक एकर आधिकारिक पेज पर भेलै, जकरा अनेको मिथिलावासी देखलनि-सुनलनि आ सराहना कयलनि।
एहि प्रथम एपिसोडक विषय छल ‘मिथिला-मैथिलीक प्राप्त अधिकारक व्यवहार आ अप्राप्तक मार्ग’ ‘चर्चा-परिचर्चा’मे सहभागी भेलथि जमशेदपुरसँ डाॅ अशोक अविचल जे साहित्य अकादेमी(संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार) मैथिलीक पूर्व प्रतिनिधि आ सम्प्रति – प्राचार्य, एलबीएसएम कॉलेज जमशेदपुरक छथि। दोसर सहभागीक रुपमे शिक्षिका चंदना दत्त
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त (राजकीयकृत मध्य विद्यालय) राँटी, मधुबनीसँ छलीह, तेसर सहभागी डाॅ विनय कर्ण, निदेशक : उग्राद्या रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, पटना एवं चारिम धर्मेन्द्र कुमार झा
प्रबंध संपादक, मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राष्ट्रीय मैथिली दैनिक) केर जुड़ल छलथि।
चर्चा बहुत सकारात्मक एवं दिशा देखाबयवाला भेल। विशेषतः डाॅ अशोक अविचलक मिथिला-मैथिलीक विशाल अनुभवक दिशानिर्देश उत्साहवर्धक आ मार्ग देखाबयवाला रहल। तहिना डाॅ विनय कर्णक सामाजिक अनुभव, शिक्षिका चंदना दत्ताक संबंधित विषयक प्रत्यक्ष अनुभव एवं धर्मेन्द्र कुमार झा’क लगातार मिथिला-मैथिलीमे घुलल रहलाक अनुभवसँ चर्चा-परिचर्चाक उद्येश्यक एकटा दिशा प्राप्त भेल। चर्चा परिचर्चामे एहि बात पर जोर देल गेल जे हमरा लोकनिकेँ मात्र चर्चे-परिचर्चा धरि सिमित नहिं रहबाक अछि, बल्कि संगहि-संग ताहिसँ निकलल योजनाक क्रियान्वयनमे सेहो लागि जयबाक अछि। एकटा व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाबय केर अछि आ ताहि लेल लगातार चर्चा-परिचर्चा करैत आगू बढ़य केर अछि।
मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश एकटा मिडिया प्लेटफार्म जँका चर्चा-परिचर्चा कराबैत रहत, मार्ग मिथिलावासी निकालथिन, मिडियाक काज मिडिया करत ।
डाॅ अशोक अविचल कहलनि, ‘मातृभाषामे शुद्ध-अशुद्ध नहिं देखल जाइत छैक, से अन्य भाषामे देखल जाइत छैक, सुन्दरता कनियाक देखल जाइत छैक, मायक नहिं, माय तऽ माय छैक, सदा सब स्थितिमे पूज्यनीयां।
एखनि ज्वलंत मुद्दा अछि जनगणना। जेना की सभगोटे जानैत छी जे एकटा संवैधानिक भाषाक दर्जा भेटलाक बादो जनसंख्याक काॅलममे मैथिली भाषाक स्थान नहिं देल गेल अछि, एहिसँ मैथिलीक वर्तमान स्थिति आ सरकारक मनसा ज्ञात कयल जा सकैछ। प्रायः अन्य भाषाक काॅलममे जा कऽ मैथिली अपनेसँ लिखि सकैत छी, एहि तरहक उपाय अछि।
कहबाक तात्पर्य जे एहेन परिस्थितिमे जँ आबौंह मिथिलावासी नहिं जगबै तऽ विकट स्थितिमे आबि सकैत छी।
चर्चा-परिचर्चामे एहि लेल डाॅ अशोक अविचल जनगणनामे समस्त तीसो जिलावाला मिथिलावासी मातृभाषाक काॅलममे मैथिली लिखाबैथ, ताहि लेल मिथिला-मैथिलीक संगठन सभकेँ जनसंपर्क अभियान विशेष रुपसँ चलाबय केर आह्वान कयलनि अछि। हुनका अनुसार मिथिला-मैथिलीक जतेक धरातल पर संगठन सभ छी, से सभ अपना-अपना स्तरसँ मैदानमे कूदि जाउ आ अपन-अपन क्षेत्रक दायरामे लोककेँ जनसंख्याक काॅलममे ‘मैथिली’ लिखय हेतु प्रेरित करु, एकर लाभ बताउ, रुचि जगाउ। धरातलसँ दुर जे शहर-नगर-महानगर ओ विदेशोमे जे संगठन सभ छी से सभ अपन प्रतिनिधिक माध्यमसँ धरातल पर ई अभियान चलाबथि आ शोसल मिडिया, संचार तंत्र आदिक माध्यमसँ एक-एक मिथिलावासीक मोबाइल धरि ई संवाद पहुँचय तकर प्रयास करथि। जनगणना शुरू भऽ गेल छैक, तें नियारक आब समय नहिं छैक, सीधे मैदानमे कूदय केर समय छैक।
संगहि संग प्राथमिक वर्ग कक्षा ०१सँ ०५ वा ०८ धरि मिथिला क्षेत्रक विद्यालय सभमे शिघ्र मैथिलीक माध्यमसँ पढ़ौनी शुरु होय तकर जनजागरण आ उपाय सेहो करथि, जेना पंचायतक मुखिया वा अन्य जनप्रतिनिधि सभकेँ एहि लेल प्रेरित करथि। प्रशासनिक स्तर पर, जिलाधिकारी, शिक्षा पदाधिकारी आदि सभकेँ ठाम-ठामसँ एकसंग ज्ञापन आदि देथि आ एकटा तय समय देल जाय।
चर्चासँ तेसर जे बात निकलि कऽ आयल ताहिमे डाॅ अविचलक अनुसार ई जे संगठनक पदाधिकारी सभकेँ क्रमशः चर्चा-परिचर्चामे सम्मिलित कऽ मिथिला-मैथिलीक समस्या सभक त्वरित समाधान निकालल जाय। एहि संदर्भमे धर्मेन्द्र कुमार झा पहिलुक प्रयासक सेहो चर्चा कयलनि आ कहलनि जे मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश एहि तरहक एकटा प्रयास बहुत पहिने सेहो कयने छल आ ‘मैथिल संगठन संघ’क रुपमे शताधिक संगठन सभकेँ महाबैसारक लेल विभिन्न संगठनक पदाधिकारी सभक सहयोगसँ जोड़ल गेल छल, मुदा सफलता नहिं भेटि सकल छलैक। डाॅ अविचल कहलनि जे पुनः चर्चा-परिचर्चाक माध्यमसँ ई काज कयल जाए आ कोनो ठाम एकटा संगठन सभक सम्मेलन कयल जाए। तऽ आगू चर्चा-परिचर्चामे मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश एकटा मिडियाक दायित्व निभाबैत लगातार एहि विषय पर संगठन सभक पदाधिकारीक बीच चर्चा कराओत।
डाॅ अशोक अविचल अजय नाथ झा शास्त्रीक सराहना करैत लीकसँ हटिकेँ वास्तविक काज सभ करबाक बात कहलनि। अपने डाॅ लक्ष्मण झा एवं ओशोसँ प्रभावित होबय केर बात कहलनि। संप्रति डाॅ अविचल अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषदक अध्यक्ष सेहो छथि आ धनाकर ठाकुर एवँ वैद्यनाथ चौधरी बैजूक मिथिला-मैथिलीमे शीर्षस्थ भूमिकाकेँ अनुकरणीय बतेलनि। मैथिल संस्था- संगठन सभक हालमे चेतना समिति द्वारा बैसारक सेहो चर्चा कयलनि, तहिना अखिल भारतीय मिथिला संघ दिल्लीक विजय चन्द्र झा’क मिथिला-मैथिलीमे योगदानकेँ अनुकरणीय बतेलनि।
डाॅ अविचल चर्चाक क्रममे अनेक उदाहरण दैत श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई सहित जयकांत मिश्र, उदय नारायण सिंह नचिकेता, गौतम ऋषिक विज्ञान, बाबू श्रीकृष्ण सिंहक समयसँ मैथिली केर बाँटय केर षड्यंत्र, बाबू जानकी नंदन सिंह आ बाबू देवनारायण झाक अनुपम अनुकरणीय योगदान, तहिना एखनुक मिथिला क्षेत्रसँ अर्थात मैथिल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आ जदयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा आदिक चर्चा कयलनि। तहिना मिथिला-मैथिलीक प्राप्त जे अधिकार अछि, मुदा ताहिसँ मिथिलावासी वंचित छी, तकरा प्राप्त करय केर अनेक उपाय बतेलनि आ अप्राप्त अधिकार सभक प्राप्तिक सेहो उपाय सभ बतेलनि।
शिक्षिका चंदना दत्त मैथिलीक वर्तमान परिस्थिति पर चिंता जतेलनि आ एकरा ठिक करय लेल जनजागरणक माध्यमसँ जनचेतना जगाबय पर जोर देलनि, भोला लाल दास, मणिपद्म आदिक काजकेँ आगू बढ़ाबय केर आह्वान कयलनि।
आगू शिक्षिका चन्दना दत्त कहलनि जे विद्यालयमे बच्चा जखनि नवम कक्षामे अबैत अछि तखनि मैथिली पढ़नाय आरम्भ करैत अछि, तैं स्वाभाविक रूपें बच्चा सभके मैथिली सीखयमे दिक्कत होइत छै। स्कूलमे प्राथमिक स्तर पर मैथिली भाषा पढ़ेबामे सामान्यतः कोनो वैधानिक अड़चन नै छै मुदा मैथिली भाषा माध्यममे प्राथमिक स्तर पर पढ़ेबाक लेल शासकीय आदेश आवश्यक छै।
डाॅ विनय कर्ण एकजूटता पर बल दैत मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक मिडियाक रूपमे मिथिला-मैथिलीमे सामुहिकता आनय लेल जे एकटा प्लेटफार्म चर्चा-परिचर्चाक लेल दऽ रहल अछि तकर सराहना करैत कहलनि जे संगठन सभ एकर लाभ उठाबथि आ आपसी सहमतिसँ एकटा विशाल जनशक्तिक रुपमे प्रस्तुत भऽ सभ तरहसँ अपन काज निकालि मिथिलाक स्थान मान सम्मान वापस आनथि।
आगू मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश फोरम केर नव प्रकल्प ‘ऑनलाइन चर्चा – परिचर्चा’ केर शुभारंभक स्वागत करैत डॉ. विनय कर्ण एहि चर्चामे सहभागी सभ विद्वान विदुषी वक्तागणक हार्दिक अभिनन्दन कैलन्हि। संगहि ओ मैथिली भाषाक माध्यमसँ प्राथमिक स्तर पर पढौ़नी आरम्भ करेबामे प्रशासनिक उदासीनता केर मुख्य कारण मानैत छथि। ओ कहलन्हि कि एहि लेल सामाजिक दवाब एवं एकजुट प्रयास आवश्यक एवं अपेक्षित अछि। एहि दिशामे राष्ट्रीय मैथिली दैनिक ‘मैथिल पुनार्जागरण प्रकाश’ एवं मैपुप्र फोरम लगातार प्रयास आ निरन्तर संघर्ष कs रहल अछि।
धर्मेन्द्र कुमार झा कहलनि जे मिथिला, मैथिली भाषा आ मिथिलाक्षर लिपिक वास्ते पं अजयनाथ झा शास्त्री अक्सरहाँ नव नव आईडिया लऽ कऽ अबैत रहैत छथि आ किछु ने किछु नीक नीक काज करैत रहैत छथि। मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश अखबारमे तs एक टा पूरा पृष्ठ मिथिलाक्षर लिपिक लेल समर्पित कs देने छथिन मुदा मैथिली भाषाक प्रति लोकमे हीन भावना छै। अखनहुँ मिथिलामे आम जन मैथिलीक अपेक्षा हिन्दी केर प्राथमिकता दैत छथि। मैथिली आ मिथिला केर संघर्ष करै वला लोक आ संस्था सभमे पारस्परिक द्वेष देखबामे अबैत छै जे उचित नहि। सभकें एक ठाम आबि एक संग समेकित प्रयास करबाक चाही।
एहि परिचर्चाक संचालन मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक संपादक पं. अजय नाथ झा ‘शास्त्री’ अत्यंत कुशलतासौं कएलन्हि।
