प्रत्येक जाति लग कतेक जमीन आ आमदनी? बिहार सरकार 216 पन्नाक एकटा विशेष किताब जारी कय रहल
पटना। समदिया
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आब बिहारमे भेल जाति आधारित जनगणना आ सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षणक आंकड़ाकेँ स्थायी दस्तावेजक रूपमे सुरक्षित रखबाक तैयारी पूरा भ गेल अछि। सामान्य प्रशासन विभाग एकटा विशेष किताबक प्रकाशनक प्रक्रिया लगभग पूरा कएने अछि। एही दस्तावेजकें उद्देश्य केवल डाटाकें सार्वजनिक करनाय नहि अछि बल्कि भविष्यकें लेल एकरा प्रामाणिक संदर्भ सामग्रीकें रूपमे संरक्षित करनाय सेहो अछि।
बिहारक सामान्य प्रशासन विभाग एहि 216 पन्नाक पोथीक प्रकाशनक तैयारी पूरा कय लेलक अछि। सरकारक प्राथमिक उद्देश्य डिजिटल डाटाकें प्रामाणिक संदर्भ दस्तावेजक रूपमे संरक्षित करनाय अछि। एहि पोथीमे जनसंख्याक आंकड़ा मात्र नहि, बिहारमे प्रत्येक जातिक कतेक कृषि भूमि अछि, कतेक लोक सरकारी वा निजी नौकरीमे छथि आ प्रत्येक श्रेणीक औसत मासिक आय की अछि, एकर सटीक आंकड़ा सेहो रहत। ई आंकड़ा भविष्यमे नीति निर्माता, समाजशास्त्री आ शोधकर्ता लेल एगो मार्गदर्शकक काज करत। खबरि अछि कि सरकार एही दस्तावेजकेँ औपचारिक प्रकाशनक तैयारी केर अंतिम चरणमे अछि।
ध्यान देबऽ केर बात अछि कि जाति सर्वेक्षणक चर्चा अखनि धरि मुख्य रूपसँ जनसंख्या केर आंकड़ा धरि सीमित रहल अछि, मुदा सरकार द्वारा तैयार कयल जा रहल एही पुस्तकमे सामाजिक आ आर्थिक स्थितिसँ जुड़ल बहुत महत्वपूर्ण तथ्य शामिल अछि। एहिमे विभिन्न जाति आ वर्गक लग कृषि भूमि, रोजगारक स्थिति, सरकारी आ निजी क्षेत्रमे ओकर भागीदारी आ औसत मासिक आय केर विस्तृत आंकड़ा शामिल अछि।
राज्य सरकारके माननाय अछि कि इ संकलित आंकड़ाकें सार्वजनिक कयलासँ सही लक्षित समूहकें कल्याणकारी योजनाकेँ पहुंचावयमे सुविधा होयत। जेना आर्थिक सर्वेक्षणकें दौरान पहचानल गेल अत्यंत पिछड़ल वा गरीब परिवारकें लेल विशेष योजनाकें विकास कयल जा सकय। एहि पोथीमे इहो स्पष्ट होयत जे एतेक वर्षक शासनक बाद कोन जाति आर्थिक प्रगति कयलक अछि आ कोन जाति एखनो विकासक दौड़मे पाछू अछि ।
राजनीतिक विशेषज्ञक मानब अछि जे ई पुस्तक सामाजिक न्याय, आरक्षण, आर्थिक असमानता आ विकास जँका मुद्दा पर भविष्यमे होय वला बहस लेल एगो नव दिशा प्रदान कय सकैत अछि। जमीन, रोजगार आ आय केर जाति-वार आंकड़ाक प्रचार-प्रसारसँ राज्यक सामाजिक संरचनाक बारेमे नव चर्चा सेहो भ सकैत अछि। ध्यान देबय योग्य बात ई अछि जे बिहार सरकार एहिसँ पहिने एहि आंकड़ाक आधार पर राज्यमे आरक्षणक दायरा बढ़ा देने छल। आब जखन प्रत्येक जातिक आर्थिक आ धनक प्रामाणिक विवरण सहजतासँ उपलब्ध भ गेल अछि तँ क्षेत्रीय दल केर “जनसंख्या जतेक बेसी होयत, अधिकार ओतेक बेसी” केर मांग बेसी आक्रामक भ सकैत अछि। ओना देखल जाय तँ सरकार कहियो हम दो हमारे दो केर नारा देने छल, जे ऊँच जाती केर लोक सहर्ष स्वीकार कय पालन कयलक, मुदा आब सरकार जनसंख्याक आधार मानि जँ कोनो फैसला करत तँ इ सामजिक समस्या उत्पन्न करत।
