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‘वंदे मातरम’क अनादरकेँ दंडनीय बनेबाक विधेयक राज्यसभामे पेश, हंगामाक बीच कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली। समदिया

वामपंथी दलक सदस्य शुक्रदिन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ केँ कानूनी सुरक्षा दै केर प्रस्तावक कड़ा विरोध कयलनि। राज्यसभामे भेल हंगामाक कारण सदनक कार्यवाही सोमदिन धरि स्थगित भ गेल। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय राज्यसभामे राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश कयलनि। एही विधेयकक उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मानक अपमान निवारण अधिनियम, 1971 मे संशोधन करब अछि। मौजूद कानूनक तहत राष्ट्रीय झंडा, संविधान वा राष्ट्रगानक अनादर कयला पर तीन साल धरि जेलक सजाक प्रावधान अछि।

प्रस्तावित संशोधनमे ‘वंदे मातरम’ केर अनादर कयला पर सेहो एहने सजाक प्रावधान शामिल अछि। वामपंथी दल, खासकय सीपीआई (एम) एहि कदमक कड़ा आलोचना करैत एकरा असंवैधानिक आ मौलिक अधिकारक उल्लंघन बता रहल अछि।

राज्यसभा सदस्य आ सीपीआई (एम) केर नेता जॉन ब्रिटास नियम 67 केर तहत एही विधेयककेँ पेश करय पर आपत्ति करैत  नोटिस जारी कयलनि। ब्रिटास कहलनि कि ओ कानूनक माध्यमसँ देशभक्ति आ राष्ट्रवादक संचार नहि कय सकैत छथि।

ए. रहीम आ संतोष कुमार पी. समेत सीपीआई केर अन्य सदस्य सेहो एही विधेयकक विरोध करैत नोटिस देलनि।

संतोष कुमार पी. टिप्पणी कयलनि जे छात्र आन्दोलनसँ जनमानसक ध्यान भटाबय लेल ई विधेयक पेश कएल गेल अछि। ओ इहो कहलनि जे, ‘वंदे मातरम’ हमरा सभकेँ विभाजित करयसँ बेसी एकजुट करैत अछि।

विधेयक पेश करय वला गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय सदनकेँ याद दिलाबैत कहलनि कि संविधान सभा राष्ट्रगीत आ राष्ट्रगानकेँ बराबरक दर्जा देलक आ सरकारक एही कदमक बचाव कयलक।

हुनक कहब छल कि ‘वंदे मातरम’ केँ 24 जनवरी 1950 सँ उचित सम्मान भेटल अछि आ इ संशोधन एकरा लेल कानूनी सुरक्षाकेँ आओर मजगूत करत।

विधेयक पेश भेला पर सदनमे हंगामा मचि गेल। विपक्षकेँ नरम पड़बाक कोनो संकेत नहि भेटला पर उपसभापति हरिवंश सिंह कार्यवाही 27 जुलाई धरि स्थगित कय देलनि। नव प्रावधानक तहत ‘वंदे मातरम’ केर गायनमे बाधा पहुंचाबय वा कोनो तरहेँ एकर अनादर कयला पर सजाक प्रावधान अछि। एहि घटनाक्रमसँ भयंकर राजनीतिक बहस शुरू भ गेल अछि।

जनतब दी जे इ विधेयक मानसून सत्रक पांचम दिन पेश कयल गेल। इ सत्र पहिने सँ नीट पेपर लीक कांड जँका मुद्दा पर बार-बार भेल हंगामाक कारणसँ बाधित रहल अछि। अगिला सप्ताह जखनि सदनक कार्यवाही फेरसँ शुरू होयत, तँ सरकार आम सहमति बनाबय केर नव कोशिश कय सकैत अछि।

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