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पाँचम ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चामे सेहो जनगणनामे मैथिली एवं मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा पर समीक्षा

डॉ धनाकर ठाकुर, साहित्यकार इरा मल्लिक, अभियानी राम नरेश शर्मा आ डाॅ शिव कुमार मिश्रक संग प्रस्तोताक भूमिकामे डाॅ विनय कर्णक जबरदस्त विमर्श

निज समदिया!! मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क पाँचम एपिसोडमे सेहो जनगणनामे मैथिली एवं मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा पर विस्तृत समीक्षा कएल गेल।

मिथिला-मैथिलीक शीर्षस्थ अभियानी डा. प्रो. धनाकर ठाकुर, राँचीसँ, साहित्यकार इरा मल्लिक, जामनगर गुजरातसँ, अभियानी रामनरेश शर्मा मुंबईसँ एवं शोधकर्ता आ इतिहासकार डाॅ शिव कुमार मिश्र पटनासँ एहि चर्चा-परिचर्चामे सहभागी भेलथि।

डाॅ विनय कर्ण प्रस्तोताक रूपमे शुरुआत करैत समस्त आमंत्रित सहभागीक स्वागत करैत परिचय करेलनि।

डाॅ धनाकर ठाकुर कहलनि, सोचनीय बात जे पहिने जनगणनाक फार्मक काॅलममे ४० नंबर पर मैथिली रहैत छल, से नहिं अछि, मुदा ५३ नंबर पर भोजपुरी अछि। ओ कहलनि जे मैथिली मिथिलावासीक प्रत्येक जाति-धर्मक भाषा अछि, सभक मातृभाषा अछि, अपन मिथिला राज्य नहिं हेबाक कारण हिन्दीकें राजभाषा बना देल गेल अछि, जनगणनामे अपन संख्याबल देखाबय लेल प्रत्येक मिथिलावासीकेँ मातृभाषाक काॅलममे मैथिली लिखाबय पड़त, एहि लेल ओ घर-घर पर्चा बाँटय केर बात सेहो कयलनि।शास्त्रीय भाषाक मान्यता विषय पर ओ कहलनि मैथिली अति प्राचीन भाषा अछि, १३२४ इस्वीक ज्योतिश्वरक वर्ण रत्नाकरसँ पहिने नवम शताब्दीक वाचस्पतिक कम्ब रामायण मिथिलाक्षरमे छल, जकरा गायब कऽ देल गेल, उड़िया, मलयालम आदि कतेको मैथिलीक बादक भाषाकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा भेटि गेल मुदा मैथिली संग छल कयल जा रहल अछि।

मुंबईसँ सुच्चा मैथिलक संस्थापक अध्यक्ष जनगणनामे मैथिली लिखाबयमे शिक्षक-शिक्षिकागणक अधिकाधिक सहयोग लेबाक बात पर जोर देलनि, संगहि जनजागरण लेल शोसल मिडियाक उपयोग, इमेल.ओआरजी पर हस्ताक्षर अभियान एवं ट्विटर ट्रेंड आदि उपायक सुझाव देलनि संगहि मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषामे सम्मिलित कराबय लेल स्थानीय स्तर पर नेताजी सभकेँ पकड़ि काज बनाबय केर बात कहलनि।

साहित्यकार इरा मल्लिक जनगणनामे मैथिली लिखा संख्याबल देखेबाक नितान्त आवश्यकता बताबैत, एहि लेल विविध स्थान पर बैसार कऽ विमर्शसँ समाधान निकालय केर राह देखेलनि। मैथिली केर शास्त्रीय भाषा पर ओ कहलनि जे सभटा मानक मैथिली पूरा करैत अछि – चर्यापद, मौलिकता, प्राचीनता, अप्पन प्राचीन मिथिलाक्षर लिपि, समृद्ध साहित्य आदि।

डाॅ शिव कुमार मिश्र जनगणनामे मैथिली लिखाबय केर जागरुकता लेल मिथिलाक्षर साक्षरता अभियानक जोरदार भूमिका भऽ सकैत अछि, ई बात कहैत पं अजय नाथ झा शास्त्रीकेँ विशाल संख्यामे पसरल गाम, शहर, नगर महानगरक अभियानीगणकेँ एहि लेल जागृत करय केर बात कहलनि। ओ जनगणनामे मैथिली लिखाबयमे स्त्रीगणक महत्वपूर्ण भूमिका रहय केर बात पर जोर देलनि।

डाॅ शिव कुमार मिश्र मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषा पर जबरदस्त प्रकाश दैत अपन कयल काजक जे वर्णन कयलनि से अभूतपूर्व अछि एवं लगभग सभ काज कयल अछि, मुदा विविध षड्यंत्रक कारण ई नहिं भऽ पाबि रहल, एकर सार्वजनिक रुपसं खुलासा कयलनि। ओ एहि लेल अपन ३१० पृष्ठक प्रोजेक्ट आ शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय पुनः प्रधानमंत्री धरि बात केर जिक्र करैत बाधक तत्वक खुलास कयलनि आ कोना ई अधरमे लटकल अछि से फरिछा कऽ कहलनि। ताहि पर अजय नाथ झा शास्त्री हुनका अंतर्मोनसँ धन्यवाद दैत ई परिचर्चा सफल भेल आ सभटा सूत्र आ समाधानक मार्ग शास्त्रीय भाषामे मैथिली लेल अहाँक माध्यमसँ आइ ज्ञात भेल से कहलनि आ हुनक काजक लेल जोरदार ढ़ंगसँ प्रसंशा कयलनि, संगहि एहि कार्यक्रमक प्रस्तोता डाॅ विनय कर्णकेँ एहि चर्चा परिचर्चामे डाॅ शिव कुमार मिश्र एहेन व्यक्तित्वकेँ आनय लेल धन्यवाद देलनि।

ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चाक पाँचम एपिसोडमे संयोजन आ संचालन सहयोग एवं प्रस्तोताक रूपमे डाॅ विनय कर्णक साधल भूमिकासँ ई पाँचम एपिसोड अत्यंत प्रभावशाली एवं मार्ग देखाबयवाला रहल।परिचर्चाक अंत मे सब वक्ता एवं श्रोता लोकनिकें ओ धन्यवाद ज्ञापित कएलनि।
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मातृभाषाक कॉलममे जौं ‘मैथिली’ नहि लिखायब तs अपन अस्मिता नहि बांचत आओर ने आत्म सम्मान सुरक्षित रहत— डॉ. धनाकर ठाकुर
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मैथिली भाषानुरागी माननीय सांसद संजय झा जौं ठानि लेताह तs मैथिली के शास्त्रीय भाषाक दर्जा भेटि सकैत अछि — डॉ. शिव कुमार मिश्र
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‘जनगणनामे मैथिली एवं मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा’ विषय पर रवि दिन आयोजित परिचर्चामे प्रख्यात पुराविद एवं मैथिली साहित्य संस्थान पटनाक सचिव डॉ. शिवकुमार मिश्र मैथिली भाषाकें शास्त्रीय भाषाक दर्जा प्रदान करेबा लेल अखनधरि कएल गेल सघन एवं सतत प्रयासक विवरण दैत कहलनि कि माननीय सांसद संजय झा जौं ठानि लेताह तs मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा अवश्य भेटि सकैत अछि।

31मई कें मैपुप्र द्वारा भेल ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा एपिसोड – ०५ मे मिथिला मैथिलीक लेल संघर्ष करs वला सेनानी सभमे अग्रणी, अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद आओर मिथिला राज्य संघर्ष समिति केर संस्थापक डॉ. धनाकर ठाकुर , सुच्चा मैथिल केर संस्थापक राम नरेश शर्मा जी (मुंबई), साहित्यसेवी, संगीतज्ञ एवं मिथिलाक्षर साक्षरता अभियानी इरा मल्लिक (जामनगर, गुजरात) आओर विद्वान पुरातत्त्वविद एवं शोध पत्रिका ‘मिथिला भारती’क सम्पादक डॉ. शिवकुमार मिश्र (पटना) सँ प्रमुख वक्ताक रूपमे अपन-अपन विचार रखलनि।

परिचर्चामे डॉ. धनाकर ठाकुर एहि बात पर जोड़ देलन्हि कि आगामी जनगणनामे सभ मिथिलावासीकें मातृभाषाक कॉलममे ‘मैथिली’ लिखेबा पर ध्यान रखनाय जरूरी अछि, तखनहि अपन अस्मिता बांचत आओर आत्म सम्मान सुरक्षित रहत।

मिथिला मैथिलीक लेल मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश द्वारा कएल जा रहल प्रयासक सराहना करैत राम नरेश शर्मा कहलनि जे मिथिलाक्षर साक्षरता अभियानक माध्यमसँ मिथिला, मैथिली एवं मिथिलाक लिपिक सम्बन्धमे जेना सर्वत्र जागरूकता आएल। एहि तरहें गाम -देहात आ शहर सभमे मास्टर साहेब यानि शिक्षक लोकनिसँ सम्पर्क कs केँ सामान्य मिथिला वासीक बीच सेहो जनगणनामे मातृभाषाक रूपमे मैथिली लिखेबाक लेल चेतना जागृत कएल जा सकैत अछि।

एहि सम्बन्धमे इरा मल्लिक कहलन्हि कि मैथिली भाषा प्राचीन एवं समृद्ध भाषा अछि जेकर इतिहास चर्यापद तकसँ सेहो सम्बन्धित अछि। एकरा मातृभाषाक रूपमे जनगणनामे लिखनाय हमर सभक कर्तव्य थिक। ओ ईहो कहलन्हि कि मैथिलिकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा प्रदान करेबा लेल समवेत प्रयास कएल जेबाक चाही।

जनतब जे साँझ ०६:०० बजेसँ ०७:३० धरि आयोजित भेल एहि ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चाक लाइव प्रसारण मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक आधिकारिक फेसबुक पेज पर भेल।

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