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सातम ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चामे जनगणनामे मैथिली हेतु समस्त मिथिलावासीक समवेत प्रयास पर समीक्षा

अजय नाथ झा शास्त्रीक संचालनमे, संयोजक प्रो शीतलांबर झा, राम सेवक ठाकुर, बबीता चौरसिया, विष्णुदेव यादव आ जटाधर पासवानक संग प्रस्तोताक भूमिकामे धर्मेंद्र कुमार झा केर उपयोगी विमर्श
निज समदिया!! मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क सातम एपिसोडमे, जनगणनामे मैथिली हेतु समस्त मिथिलावासीक समवेत प्रयास, पर विस्तृत समीक्षा कएल गेल। ‘मैथिली भाषाकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा’ भेटए, प्राथमिक वर्गमे मैथिलीक माध्यमसँ पढ़ौनी, जनगणनामे आम जनमानस मैथिलीकेँ अप्पन मातृभाषाक रूपमें लिखाबय, एहि लेल मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश फोरम एकटा मुहीम चला रहल अछि। ऑनलाइन चर्चा – परिचर्चाक माध्यमे अनेको विद्वान आ बुद्धिजीवी लोकक मत लेल जा रहल अछि।

कार्यक्रमक आरंभ में पं. अजय नाथ झा शास्त्री कहलनि कि, जॉर्ज ग्रियर्सनक मिथिलाक किछु भाग पड़ोसी देशमे मिला लेल गेल। भारतक तीस जिलावला मिथिलाक सेहो छः टा जिला फिलहाल झारखंडमे चलि गेलाक बाद आब जे बिहारक नक्शा अछि, ताहिक अधिकांश भूभाग आब मिथिले केर बाँचल अछि। मुदा समाजमे भाषाक नाम पर जे द्वेष आ घृणा पसारल जा रहल अछि, ई निश्चित रूपसँ कोनो षड्यन्त्रक अंतर्गत कएल जा रहल अछि। सरकारक मंसा साफ अछि कि, मिथिला क्षेत्र केर सिमित क’ देल जाए। ताहि दिशामे कार्य सेहो भ’ रहल अछि।

हुनका अनुसार मिथिला क्षेत्रमे बाजल जाएवला भाषामे प्रत्येक पांच – दस कोस पर अंतर भ’ जाइत छैक, मुदा ओहो बोली – भाषा मैथिलीए अछि। एकरा मात्र बज्जिका, अंगिका, सुरजापुरी नहि कहल जा सकैत अछि। हँ …. जौं कहब आवश्यक अछि त’ एकरा वज्जिका मैथिली आ अंगिका मैथिलीक रूपमे प्रयोग कएल जा सकैत अछि।

कार्यक्रममे अप्पन विचार रखैत ‘मैथिल समाज रहिका’क प्रसिद्ध आंदोलनी अभियानी प्रो शीतलाम्बर झा कहलनि कि, भाषा – आ बोलीमे किछु अंतर संभव अछि, मुदा अछि ओहो मैथिलीए। आ एहि बेरक जनगणनामे हर मैथिल जौं अप्पन मातृभाषाक रूपमे मैथिली लिखबैत छथि त’ आधिकारिक रूपसँ मैथिल, मिथिला आ मैथिली भाषा सशक्त बनि सकैत अछि। प्रो शीतलाम्बर झा अप्पन वक्तव्यमे आगू कहलनि कि, “हम सभ एहि बेरक जनगणनामे अपन मातृभाषा मैथिलीकेँ उचित सम्मान दिएबाक प्रयास अवश्य करब”। एहि लेल प्रो झा अनेको महत्वपूर्ण विचार सभ रखलनि, अप्पन संबोधनक क्रममे ओ आगू कहलनि कि, “हम सभ जनजागरण अभियान चलायब आ पंचायत स्तर पर अप्पन संघ “मैथिल समाज रहिका” आ राजनीतिक संघटनक सहयोगसँ हर घर धरि पहुँचबाक प्रयास करब।

विचार विमर्शक क्रममे प्रस्तोता धर्मेंद्र कुमार कुमार झा केर प्रश्नक उत्तर दैत बहुमुखी प्रतिभाक धनी चर्चित उद्घोषक मिथिला रत्न रामसेवक ठाकुर कहलनि कि, “ई निश्चित रूपसँ दुर्भाग्यपूर्ण अछि कि, मिथिला क्षेत्रमे मैथिल समाजकेँ मैथिली बाजय, पढ़ए आ मातृभाषाक रूपमे स्थान देबाक लेल अपील वा आव्हान करए पड़ि रहल अछि”। रामसेवक ठाकुर अप्पन वक्तव्यमे कहलनि कि, जहन बंगालमे बंगाली, पंजाबमे पंजाबी त’ मैथिली किएक नहि ? जनगणनामे प्रत्येक मैथिल अप्पन मातृभाषाक रूपमे मैथिली लिखिबथि एहि लेल अपन प्रयाससँ हर तरहक प्रयासक आश्वासन दैत रामसेवक ठाकुर अप्पन वक्तव्य समाप्त कएलनि।

तहिना, एहि विषय पर अप्पन विचार रखैत बबिता चौरसिया (प्रदेश अध्यक्ष – बीपीएससी अध्यापक संघ, बिहार) कहलनि कि, “जनगणनाक दू चरण संपन्न भेल अछि जाहिमे घरक गणना कएल गेल अछि, आब जखनि तेसर चरणक शुरुआत होयत त’ हम सभ धरातल पर लोककेँ मैथिली लिखाबय लेल अवश्य प्रेरित करब”। अप्पन सुझावमे बबिता अनेको महत्वपूर्ण मुद्दा पर गप्प कएलनि जाहिमे, अज्ञानतावश आ कर्मचारी सभक चालाकी पर सेहो खुलि क अप्पन विचार रखलनि। बहुत रास लोक बुझि नहि पबैत अछि आ अनेको लोक कर्मचारी पर छोड़ि अप्पन कर्तव्यक निर्वाह करैत छथि।

‘सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रक भाषा जाहि-जाहि शैलीमे प्रचलित अछि, ओ तमाम मैथिलीक अंग अछि’, लोककेँ मैथिली भाषाक संरक्षण आ संवर्धन करबाक लेल प्रोत्साहित करैत विष्णुदेव यादव (राजद अध्यक्ष – बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ सांसद प्रतिनिधि – डॉ फैयाज अहमद) व्याकरण आ तय मानकक गप्प केर प्रधानता नहि देबाक बात कहलनि। विष्णुदेव यादव राजनीतिसँ जुड़ल छथि आ सांसद प्रतिनिधि सेहो छथि त’ हुनकर दायित्व सेहो बेसी छैन्ह। विष्णुदेव यादव अप्पन विधायक आ सांसदसँ सेहो एहि जागरूकता अभियानमे सम्मिलित होयबाक गप्प कहलनि।

चर्चाक क्रममे जटाधर पासवान (उपाध्यक्ष : मैथिल समाज रहिका, पूर्व प्रमुख रहिका, प्रसिद्ध रंगकर्मी, बांसुरीबादक) कहलनि कि, लोकमे अप्पन मातृभाषाकेँ ल’ क’ एखनहु ई भ्रम व्याप्त छैक कि, हमर मैथिली शुद्ध आ आनक अशुद्ध। बहुत लोक अप्पन शैलीक प्रति संवेदनशील छथि आ दोसरक शैली पर छींटाकसी करैत छथि, ई अप्पन मैथिलीक लेल नुकसानदेह अछि। जटाधर पासवान अप्पन विचार रखैत बहुजन समाजक गप्प सेहो कएलनि। आगू ओ, लोककेँ प्रोत्साहित करबाक संग-संग दलित आ वंचित समाजकेँ अप्पन मातृभाषाक प्रति जागरूक करबाक आवश्यकता पर बल देलनि। किएक त’ एखनहु मैथिली भाषा आ बोली हुनके सभक भरोसे बाँचल अछि। एहि लेल वार्ड सदस्यसँ ल॓ क’ तमाम वरिष्ट जनप्रतिनिधि सभक सहयोग कारगर सिद्ध भ’ सकैत अछि।

कार्यक्रममे सहभागी तमाम सदस्यक विचार आ सुझाव केर देखैत पंडित अजयनाथ झा शास्त्री, पुनः जनजागरण अभियान पर बल देलनि। ई विषय कोनो नीजी नहि अछि आ ई हर मैथिल जाधरि नहि बुझि जाइत छथि ताधरि एहि तरहक अभियान चलैत रहए, एहि लेल निर्णय भेल जे आब महानगरमे रहि रहल प्रवासी मैथिल समाजकेँ सेहो एहि अभियानसँ जोड़ल जाए। पंडित शास्त्री अप्पन सम्बोधनमे कहलनि कि, जे जहिना बजैत अछि वएह मैथिली अछि आ एहि विषय पर कोनो तर्क वितर्क स्वीकार्य नहि। किएक त’ एहि तरहक मौका बेर – बेर नहि भेटैत छैक। कहबाक लेल हम सभ आठ करोड़ मैथिली भाषी छी त’ आधिकारिक रूपमे सेहो ई भ’ जाए एहि लेल सभक सहयोग अपेक्षित अछि। शास्त्री कहलनि की, बिहार त’ मात्र आब नामहि लेल बाँचल अछि किएक त’ प्रदेशक अधिकांश भाग मैथिली भाषी क्षेत्र अछि आ सरकार एकटा सुनियोजित तरीकासँ हमरा सभकेँ खंडित करबाक प्रयास कऽ रहल अछि। तैं एकजुटता आवश्यक अछि।

बुध दिन ०८/०७/२०२६ केँ मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क सातम एपिसोडमे तमाम सहभागी लोकनि आ वक्ता संगहि श्रोता लोकनिकें कार्यक्रमक प्रस्तोता धर्मेंद्र कुमार झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कएल गेल।

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