राघव चड्ढा राज्यसभामे उठौलनि डॉक्टर-डायग्नोस्टिक सेंटरक ‘कट मनी’क मुद्दा
नई दिल्ली । समदिया

राज्यसभाक सांसद राघव चड्ढा बृहस्पतिकें संसदक शून्यकाल दौरान किछु डॉक्टर आ डायग्नोस्टिक सेंटरक बीच कथित ‘कट मनी’ अथवा रेफरल कमीशनक प्रथापर गंभीर चिंता व्यक्त कएलनि। हुनकर कहब छल जे एहि अवैध व्यवस्थाक सीधा आर्थिक बोझ अंततः मरीजकेँ वहन करए पड़ैत अछि।
राघव चड्ढा कहलनि जे किछु डॉक्टर आ डायग्नोस्टिक सेंटरक बीच एहेन तंत्र विकसित भऽ गेल अछि, जाहिमे मरीजकेँ जांच लेल पठेबाक बदलामे डॉक्टरकेँ निर्धारित कमीशन देल जाइत अछि। हुनकर अनुसार, किछु मामिलामे एकटा मरीजक रेफरल पर तीन हजार रुपैया धरि कमीशन देल जाइत अछि आ एहि लेल एजेंट, तय दर आ समानांतर प्रोत्साहन व्यवस्था सेहो सक्रिय अछि।
सांसदक आरोप छल जे डायग्नोस्टिक सेंटर एहि भुगतानकेँ अपन हिसाब-किताबमे “मार्केटिंग खर्च”क रूपमे दर्ज करैत अछि, जखनि कि डॉक्टर एकरा “रेफरल कमीशन”क रूपमे देखबैत छथि। मुदा वास्तविकता ई अछि जे एकर पूरा खर्च मरीजक जांच आ इलाजक बिलमे जोड़ि देल जाइत अछि।
हुनका अनुसार एहि प्रकारक प्रथासँ इलाजक खर्च 15 सँ 20 प्रतिशत धरि बढ़ि सकैत अछि। संगहि, गैर-जरूरी जांच आ अनावश्यक रेफरलकेँ सेहो बढ़ावा भेटैत अछि, जाहिसँ मरीज पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ैत अछि।
राघव चड्ढा नागरिकसभसँ अपील कएलनि जे मेडिकल जांच कराबएसँ पहिने एहेन “रेड फ्लैग” पर अवश्य ध्यान दिअ। बादमे ओ अपन भाषणक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करैत लिखलनि जे ‘कट मनी’ व्यवस्थाक बोझ अंततः मरीज पर पड़ैत अछि, तेँ स्वास्थ्य सेवामे पारदर्शिता सुनिश्चित होयब आवश्यक अछि।
उल्लेखनीय अछि जे पूर्व Medical Council of India आ वर्तमान National Medical Commission क नियमक अनुसार डॉक्टर द्वारा रेफरल कमीशन लेन-देन अथवा फीस साझा करब प्रतिबंधित अछि। एहेन मामिला प्रमाणित होबए पर संबंधित चिकित्सकक विरुद्ध निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाईक प्रावधान अछि।
राघव चड्ढाक एहि मुद्दा केर उठेबाक पश्चात चिकित्सा नैतिकता, पारदर्शिता आ मरीजक हितक सुरक्षा पर फेरसँ राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज भऽ गेल अछि।
