धर्म-संस्कृति

राम मंदिर विवादक बीच ‘सनातन बोर्ड’ केर मांग तेज, गोविन्द देव गिरी केर इस्तीफाक मांग

अयोध्या।  समदिया

अयोध्याक राम मंदिर चंदा चोरी विवादकेँ ल कय साधु-संत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टक कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरिक इस्तीफाक मांग कयलनि। संत स्पष्ट चेतावनी देलनि कि जँ गोविंद देव इस्तीफा नहि देताह तँ साधु-संत आक्रोश प्रदर्शन करताह। संगही संत एक बेर फेरसँ सनातन बोर्डक गठनक मांग दोहरौलनि। हुनक कहब अछि कि जँ सनातन बोर्ड होयत तँ शायद एहन घटना नहि होयत। मीडियासँ बात करैत महंत देवेशाचार्य महाराज कहलनि कि गोविंद देव चंपत रायसँ भेंट कयलनि आ बातचीत भेल। चारि-पांच घंटा बैस कय गोविंद देव सभकेँ रहल छथि। मुदा, बैसारक एजेंडा सार्वजनिक नहि कयल गेल। सबसँ पहिने तँ गोविंद देव गिरिकेँ स्वयं इस्तीफा देबाक चाहि छल। ओ अपने कहलनि कि हमरा लग हस्ताक्षरक अधिकार नहि छल, चेक नहि छल, जनतब नहि छल। फेर ओ कोषाध्यक्ष कोना बनलनि। जखनि घटना सामने आयल, ओहि दिन इस्तीफा देबाक चाहि छल। चंपत राय केर पत्रक जिक्र करैत ओ कहलनि कि चंपत राय बेईमान छथि वा ईमानदार छथि। हम निर्णय नहि कय सकैत छथि। राम भक्तक नाम पर ओ पत्र लिखलनि, मुदा जखनि इस्तीफा देबाक समय छल, तहन राम भक्त कहतय छलथि। हुनक मनमे कतौ नहि कतौ खोट छल। ओ दोषीकेँ बचाबय चाहैत छल, जाहिसँ विपक्षकेँ राम मंदिरक बदनामी करय केर मौका भेटल। इ बहुत दुर्भाग्यपूर्ण अछि।

ओ कहलनि कि ट्रस्टीक लापरवाहीसँ इ चोरी भेल। चंपत रायकेँ सेहो खामियाजा भुगतय पड़त, मुदा गोविंद देव गिरि पर अखनि धरि कोनो कार्यवाही नहि भेल। ओ राजकुमार बनल बैसल छथि। हुनका सभ वक्तव्य छलावा आ साजिश भरल अछि।

साकेत भवनक महंत सीताराम दास कहलनि कि चंपत राय केर इस्तीफा स्वैच्छिक नहि, जबरन थोपल गेल। चंपत राय केर  पूरा जीवन राम जन्मभूमिकेँ समर्पित अछि। हुनक योगदान अकल्पनीय अछि, जबकि गोविंद देव केर योगदान शून्य अछि। संत समाज आ सनातनी हुनका इस्तीफा चाहैत अछि। जँ इस्तीफा नहि देताह तँ विरोध दर्ज करायब। ओ कहलनि कि गोविंद देव मुख्य दोषी अछि। तत्काल प्रभावसँ इस्तीफा देबाक चाहि।

महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज कहलनि कि अयोध्या आस्थाक केंद्र अछि। ओतय चोरीक मतलब राम भक्तक दिल पर चोट अछि। सभ दोषी पर कार्यवाही होय, चाहे कियो होय। सीएम योगी आदित्यनाथ संत स्वभावक महापुरुष छथि। एसआईटी जांच कय रहल अछि, दोषी कियो भी होय, बख्शल नहि जायत।

ओ सनातन बोर्डक गठन पर जोर दैत कहलनि जँ आइ सनातन बोर्ड रहैत तँ बद्रीनाथ, मथुरामे एहन घटना सामने नहि आबैत।

एक अन्य संत कहलनि जे लोक आइ राम मंदिर पर राजनीति कय रहल छथि, ओ कालनेमी टाइप केर लोक छथि, जे सदैव राम विरोधी रहल। ओ अपील करैत कहलनि कि राम भक्त आ सनातनीसँ कहैत छी कि कालनेमीसँ सावधान रहबाक जरूरत अछि। गलति भेल अछि, ओकरा बख्शल नहि जायत, मुदा एकर मतलब इ नहि कि सनातन, संत वा राम मंदिर पर टिप्पणी कयल जाय। इ बर्दाश्त नहि होयत।

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