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तेसर ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चामे सीबीएसई एवं सीटीईटीमे मैथिली पर समीक्षा

डाॉ विनय कर्णक संयोजनमे भैरव लाल दास, सीए आशीष नीरज, प्रो. वीरेंद्र झा, राजकुमार बटोही, मुकेश दत्त, चंदना दत्तक उपयोगी विमर्श

निज समदिया !! “मैथिली भाषाकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा’ भेटब मैथिली लेल एकटा महत्वपूर्ण आवश्यकता अछि। मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क तेसर एपिसोडमे आगुक प्रयास आ चर्चा लेल एकटा विशेष बात जे निकलिकेँ आयल से ‘मैथिली भाषाकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा’ भेटब कतेक महत्वपूर्ण अछि से मिथिला-मैथिलीक चर्चित नाम भैरव लाल दास एहि विषय पर विशेष रुपसँ प्रकाश देलनि। ओ कहलनि, “क्लासिकल लेंग्वेज के लेल सेहो अहाँकेँ सजग होबय पड़त। जँ अहाँकेँ क्लासिकल लेंग्वेजमे मान्यता नहिं भेटत मैथिलीकेँ तऽ अहाँ बहुत अधिक पाछा चलि जाएब वर्ल्ड स्तर पर। ई क्लासिकल लेंग्वेजमे भेटनाई ओतबे जरुरी छै, जतबेकि मातृभाषामे मैथिलीकेँ पढ़ौनी जरुरी छै।”

मंगल, २६-०५-२०२६ केँ मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क तेसर एपिसोड भेल। एहि तेसर एपिसोडक विषय छल – ‘सीबीएसई एवं सीटीईटीमे मैथिली पर समीक्षा।’डॉ विनय कर्णक संयोजनमे भैरव लाल दास, सीए आशीष नीरज, प्रो. वीरेंद्र झा, राजकुमार बटोही, मुकेश दत्त, चंदना दत्तक उपयोगी विमर्श भेल आ बहुत रास मार्ग देखाबयवाला बात प्रकाशित भेल।

मैथिलीक पढ़ौनी लेल सीबीएसई विद्यालय हेतु आयल केंद्र सरकारक आदेश पर सीए आशीष नीरज कहलनि, “वास्तविकता ई छैक जे जाधरि राज्य सरकारक विद्यालयमे संगहि लागू करय केर आदेश पारित नहिं हेतै ताधरि जिलाधिकारी वा जिला शिक्षा पदाधिकारी संज्ञान नहिं लेत आ ओ जाधरि संज्ञान नहिं लेत ताधरि जिलाक प्रायः कोनो तरहक पैटर्नवाला विद्यालयमे ई लागू नहिं भऽ सकत।” ओ बहुत फरिछाकेँ एहि वास्तविकता पर प्रकाश देलनि, तें राज्य सरकारक विद्यालय सभक लेल ई शीघ्र पारित होएब नितान्त आवश्यकता छैक आ एहि लेल मिथिला-मैथिलीसँ जूड़ल संगठन आ घटक सभकेँ शीघ्र प्रयास करय पड़त आ सरकार पर दबाब बनबय पड़त।

*”सीबीएसई एवं एनसीईआरटी में मैथिली पर समीक्षा”* विषय पर मंगल दिन 26 मई कें चर्चा-परिचर्चा आयोजित भेल। मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश (राष्ट्रीय मैथिली दैनिक) के फेसबुक आधिकारिक पेज पर लाइव प्रसारणमे एहि परिचर्चाक शुभारम्भ करैत मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक सम्पादक पं अजय नाथ झा शास्त्री विषय-प्रवेश करौलन्हि। मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश फोरम द्वारा आयोजित “ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा एपिसोड-03″मे कर्ण कायस्थ महासभाक राष्ट्रीय अध्यक्ष, मैथिली साहित्य महासभा (दिल्ली) के महासचिव सीए आशीष नीरज (दिल्ली सँ); सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी एवं मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसार में रत लेखक राजकुमार मिश्र ‘बटोही’ (राँची सँ); पटना विश्वविद्यालयक पूर्व विभागाध्यक्ष मैथिली विभाग प्रो० वीरेन्द्र झा (पटना सँ); मिथिलांगन, चित्रांगन एवं कर्णप्रिय पत्रिका त्रय केर सम्पादक मुकेश दत्त (मुजफ्फरपुर सँ); मैथिली साहित्य संस्थानक सचिव एवं प्रख्यात इतिहासकार भैरव लाल दास (पटना सँ); राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका एवं साहित्यकार चंदना दत्त (राँटी, मधुबनी सँ) आओर उग्राद्या रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेन्टर, पटनाक निदेशक एवं शिक्षाविद डॉ० विनय कर्ण (पटना सँ) शामिल भऽ कऽ अपन-अपन बहुमूल्य विचार प्रस्तुत कएलन्हि।

एहि परिचर्चामे उपस्थित ​सीए आशीष नीरज कहलन्हि कि शिक्षा राज्य मंत्री द्वारा माननीय सांसद कें देल गेल जवाबी पत्रमे मैथिली के सीबीएसई पाठ्यक्रममे शामिल करय सम्बन्धी जे घोषणा कएल गेल अछि तकर क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकारक कैबिनेटमे निर्णय लेबs आ’ सब जिलाक जिलाधिकारी कें आदेश पठायब आवश्यक छै। चन्दना दत्त कहलन्हि कि एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति)मे अपन मातृभाषामे प्राथमिक स्तर पर पढ़ाई करैबाक प्रावधान तऽ अछिए मुदा एकर क्रियान्वयन नहि भऽ पाबि रहल अछि। भैरव लाल दास कहलन्हि कि अपन मातृभाषाक प्रति अनुराग होबाक चाही। ओ आगू कहलन्हि कि दलान, बाजार, स्कूल, परिवार, थाना, पंचायत आदि भिन्न-भिन्न स्थानक भाषाक स्वरूप अलग होइत छै, जेकरा संग मैथिली भाषाक सामंजस्य आ’ व्यवहार आवश्यक छै। मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक रूपमे मान्यता भेटै ताहि लेल सेहो प्रयास हेबाक चाही, तखनहि मातृभाषा सुरक्षित रहि सकत। आजुक विषय के संदर्भ में प्रो॰ वीरेन्द्र झा सुझाव देलन्हि कि पहिल डेग ई हेबाक चाही जे मुख्य मंत्री आ’ शिक्षा मंत्री लग एहि विषय कें प्रस्तुत करबाक चाही जे प्राथमिक स्तर पर विद्यालयमे मैथिली भाषाक माध्यम सँ पढ़ाई तत्काल आरंभ हो, ताकि सरकार त्वरित निर्णय लेथि। डॉ॰ विनय कर्ण कहलन्हि कि मिथिला, मैथिली हेतु समर्पित सब लोकनि एवं सब संस्थाकें एकजुट भऽ कऽ एहि लेल प्रयास करबाक चाही। निजी अहं आ पूर्वाग्रह के त्यागि समेकित प्रयास सँ ई प्रयास सफल होएत। मुकेश दत्त कहलन्हि कि घर-परिवारमे बच्चा सभकें मैथिली भाषामे अनुरक्त कएला एवं माता-पिता आ अभिभावक लोकनि कें एहि दिशा मे साकांक्ष रहबाक आवश्यकता छै ताकि बच्चा सभमे मैथिली पढ़य लेल आकर्षण उत्पन्न भऽ सकय। परिचर्चाक अंत मे सब वक्ता एवं श्रोता लोकनि कें पं. अजय नाथ झा शास्त्री द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कएल गेल।

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