हाईकोर्ट धार भोजशालाकेँ मानलक मंदिर, सुप्रीम कोर्टमे याचिका दायर
नई दिल्ली। समदिया

भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामिलामे हाईकोर्ट एकटा महत्वपूर्ण फैसला जारी कयलक अछि। हिन्दू पक्षक वकीलक अनुसार कोर्ट भोजशाला परिसर केर हिन्दू मंदिरक रूपमे मान्यता देलक। कोर्ट जैन समुदाय आ मुस्लिम पक्षक याचिकाकेँ खारिज कय देलक। ई फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) केर रिपोर्टक आधार पर कयल गेल छल, जाहि पर कोर्ट भरोसा कयलक। भोजशाला मामिलामे कोर्टक फैसला एहि परिसर कय वागदेवी भगवतीकेँ समर्पित मंदिरक रूपमे मान्यता देलक। एहि मामिलामे एकटा हिन्दू पार्टी सुप्रीम कोर्टमे याचिका दाखिल कयलक। अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा माध्यमसँ जितेन्द्र सिंह ‘विशन’ द्वारा दायर याचिकामे आग्रह कयल गेल अछि जे बिना हुनका सभकेँ सूचित कयने उपरोक्त मामिलामे कोनो आदेश पारित नहि कयल जाय। जितेन्द्र सिंह ‘विशन’ एहि मामलामे छठम याचिकाकर्ता छलाह, जाहि पर इंदौरक हाईकोर्टक पीठ शुक्रदिन अपन फैसला देलक।
धार भोजशाला मामिलाक संबंधमे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन कहलनि जे, “इंदौर हाईकोर्ट एकटा ऐतिहासिक फैसलामे 7 अप्रैल, 2003 केर एएसआईक आदेशकेँ आंशिक रूपसँ पलटि देलक। एकर अलावा कोर्ट हिन्दू पक्षकेँ पूजाक अधिकार देलक आ भोजशाला परिसरकेँ राजा भोजक संपत्तिक रूपमे मान्यता देलक। मूर्तिक वापसीक मांगक संबंधमे ओ कहलनि जे लंदन केर एगो संग्रहालयमे राखल गेल अछि। कोर्ट सरकारकेँ ई आग्रह पर विचार करबाक निर्देश सेहो देलक कि मुस्लिम पक्षकेँ सरकार वैकल्पिक जमीन आवंटित करय। कोर्ट हमरा सभकेँ पूजा करबाक अधिकार देलक आ सरकारकेँ निर्देश देलक कि ओहि जगह केर प्रबंधनक देखरेख करय, ओतय हिन्दू पूजा होयत।”
भोज उत्सव समितिक अध्यक्ष सुमित चौधरी न्यायालयक फैसला पर खुशी व्यक्त करैत एकरा हिन्दू समुदायक दीर्घकालीन संघर्षक जीत बतौलनि। ओ कहलनि जे, 1935मे हिन्दू भोज समितिक स्थापना करय वला कार्यकर्ता सभ अपन पूरा जीवन एहि मुद्दा पर समर्पित कयने छलाह। उपस्थित हिन्दू केर भारी संख्या एही फैसलाक स्वागत करैत सभ दल, अधिवक्ता आ संघर्षमे शामिल लोकक प्रति आभार व्यक्त कयलनि। संस्थाक प्रतिनिधि सभ कहलनि जे ई निर्णय दीर्घकालीन प्रयासक परिणाम अछि आ सभ जिम्मेदार लोकनि धन्यवादक पात्र छथि।
मुस्लिम पक्षक दिससँ सिटी काजी वकार सादिक कहलनि कि कोर्ट केर फैसलाक विस्तृत प्रतिक पूरा अध्ययन अखनि धरी नहि कयल गेल अछि। हुनक अनुसार वकीलक टीम एही फैसलाकेँ बारीकीसँ विश्लेषण कय कोर्ट केर फैसलाक आधार पर आगू केर रास्ता तय करत। जँ एहि फैसलामे कोनो गलती भेटत तँ मुस्लिम समुदाय एकरा सुप्रीम कोर्टमे चुनौती देत। ओ कहलनि जे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई)क रिपोर्टकेँ सेहो समीक्षा कयल जाएत। ई देखब जरूरी होयत जे कोर्ट रिपोर्टकेँ कोन हिस्सा स्वीकार करैत अछि आ कोन नहि। उदाहरण दैत ओ कहलनि जे राम जन्मभूमि मामिलामे सेहो सुप्रीम कोर्ट एएसआई रिपोर्ट पर पूरा भरोसा नहि कयलक।
