धर्म-संस्कृति

‘सियापति रामचन्द्रक जयघोषसँ गुंजायमान भेल सिजौलक धरती

मधुबनी । समदिया

धर्म, भक्ति आओर श्रद्धाक संगमक अद्भुत समायोजनक साक्षी बनल सिजौलक पावन धरा। हजारोंक संख्यामे देवीस्वरूपा भगिनी एवम् मातृशक्ति सियापति रामचन्द्रजीक जयघोष करैत कलश यात्राक शुभारंभ कयलनि। अत्यन्त मनभावक, मनमोहक, मनोरम दृश्यक साक्षी बनबाक अवसर भेटलैक सिजौलकेँ। चहुँदिश भक्तिमय वातावरण बनल छल। एक समान परिधानमे सुसज्जित मातृशक्ति अपन माथा पर कलश उठाय संकेत दऽ रहल छलीह जे ई मिथिला वएह पावन भूमि छी जाहिठाम स्वयं महालक्ष्मी भगवती सीता केर रूपमे अवतरित भऽ सनातन धर्मकें जाज्वल्यमान बनेलीह। हिनके प्रतिरूपक प्रतिनिधित्व कऽ रहल छलीह हजारोंक संख्यामे उपस्थित मातृशक्ति। उत्साहक एहेन वातावरणमे विशाल भक्तजन जय सियारामक जयघोष करैत वातावरणकेँ अत्यधिक प्रासादिक बना देलनि।

सिजौल गाम एवम् मिथिलाक सपूत डाॅ. संदीप झा स्वयं पुष्पवर्षा करैत श्रद्धालुकेँ स्वागत कयलनि। जनतब दी जे डाॅ. संदीप झा द्वारा मंदिरक निर्माण कराओल गेल अछि। शिक्षा मंदिरक रूपमे संदीप विश्वविद्यालय हिनका द्वारा स्थापित अमरकृति गाथाक जीवंत प्रमाणक रूपमे देश-विदेशमे यशस्विताकेँ प्राप्त कऽ चुकल अछि।

कलश यात्री लगभग छह किलोमीटर यात्रा करैत बनौरघाटक पवित्र नदीसँ जल भरि मंदिर परिसरक लेल प्रस्थान कयलनि। पवित्र नदीक तट पर सांगी निवासी आचार्य राजेन्द्र झा मुख्य यजमान पं. नित्यानन्द झा सपत्नीकें वैदिक पद्धति अनुरूप विधानपूर्वक पूजन करौलनि। एहि अवसर पर उपस्थित आचार्यगण द्वारा सस्वर वेदमंत्रक वाचन कयल गेल। वेदमंत्रक ध्वनिसँ बनौरघाट अभिगुंजित भऽ उठल। धर्मध्वज केर रूपमे सम्पूर्ण क्षेत्रमे पताका मानु जे एहेन भव्य महोत्सवमे सम्मिलित हेबाक हकार दऽ रहल छल।

साधुग्राममे सैकड़ों संतजनक आगमन भऽ चुकल अछि। छह दिवसीय महोत्सवमे पूज्य संतजनक मुखारविन्दसँ प्रवचनक अतिरिक्त मिथिलाक नामचीन कलाकार द्वारा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन होयत। अनुमान लगाओल जा रहल अछि जे प्राण प्रतिष्ठाक दिन अर्थात् 24 अप्रैलकेँ लगभग 20 हजार श्रद्धालु सम्मिलित होएत दिव्य महोत्सवक साक्षी बनत। एवम् प्रकारेण छह दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानक शुभारंभ कलश यात्रासँ भेल। मिथिलाक महान भूमि पर सनातन धर्मक जयघोष स्वर सम्पूर्ण देशमे सनातनी समाजक कल्याणक मार्ग प्रशस्त करत एहिमे रंचमात्रहुँ संदेह नहि।

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