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चारिम ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चामे जनगणनामे मैथिली एवं मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा पर समीक्षा

डॉ कैलाश कुमार मिश्र, डॉ चंद्रशेखर पासवान, राधे भाई आ जुली झा केर संग प्रस्तोताक भूमिकामे धर्मेंद्र कुमार झा केर उपयोगी विमर्श

निज समदिया!! मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क चारिम एपिसोडमे जनगणनामे मैथिली एवं मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा पर विस्तृत समीक्षा कएल गेल। ‘मैथिली भाषाकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा’ भेटब मैथिली लेल एकटा महत्वपूर्ण आवश्यकता अछि। ‘मैथिली भाषाकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा’ भेटब कतेक महत्वपूर्ण अछि, एहि विषय पर मिथिला-मैथिलीक चर्चित नाम डॉ कैलाश कुमार मिश्र, कार्यक्रमक मध्य विस्तृत चर्चा कएलनि। ओ कहलनि, “शास्त्रीय भाषाक दर्जा प्राप्त करब कोनो बड्ड पैघ गप्प नहि छैक, मुदा एहि लेल हमरा सभकेँ राजनीतिक रूपसँ सशक्त होमय पडत। चर्चाक क्रममे डॉ मिश्र कहलनि कि, एहि सभसँ पूर्व ओहि भाषा सभक स्थिति परिस्थिति पर सेहो दृष्टिपात करबाक चाही, जाहि एगारह गोट भाषाकेँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा प्राप्त छैक। किएक त’ सरकारक उदासीन रबैया सदिखन बाधक बनल रहल। डॉ मिश्र आगू कहलनि कि, मैथिली, हर तरहेँ सक्षम अछि, मैथिली एकटा समृद्ध भाषा अछि, आ शास्त्रीय भाषाक दर्जा प्राप्त करबाक हर मानक पर सक्षम अछि। मुदा, देशमे एखनि हर क्षेत्र आ विषय पर राजनीति हावी अछि त’ एकजुटता आवश्यक अछि। जनगणनामे मैथिली भाषाक लेल डॉ मिश्र कहलनि कि, एहि लेल एकटा जन जागरूकता अभियान चलाबय पड़त आ हर क्षेत्रक सफल आ चर्चित व्यक्तित्वकेँ एहि अभियानसँ जोड़य पड़त, मात्र तखनहि ई अभियान सार्थक होयत।

शनिदिन ३०.०५.२००६ केँ मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क चारिम एपिसोडमे शामिल डॉ चंद्रशेखर पासवान अप्पन वक्तव्यमे कहलनि कि, शिक्षित आ पैघ – पैघ लोक मात्र, मैथिली भाषा लेल घातक छथि। गाम देहातमे रहि रहल सर्वहारा मैथिल, मात्र मैथिलीकेँ बचौने छथि। मिथिला क्षेत्रमें कहल जाइत अछि जे, प्रत्येक पांच कोस पर बोली आ तौर – तरीका बदैल जाइत अछि त’ किनको भाषा शैलीके दुसब, सेहो मैथिलीक प्रति लोकमे हीनताक बोध उत्पन्न करैत अछि। डॉ चंद्रशेखर आगू कहलनि कि, मिथिला क्षेत्रमे रहनिहार हर व्यक्ति मैथिल छथि आ हुनकर बोल सेहो मैथिलीए अछि, तैं हमरा सभ जौं हर तरहक टोनकेँ स्वीकार करैत एकजुटताक संग आगू बढ़ी त’ मैथिली भाषाकेँ निश्चित रूपसँ शास्त्रीय भाषाक दर्जा भेटि सकैत अछि।

परिचर्चामे शामिल राधे भाई आ लोक गायिका जुली झा सेहो अप्पन – अप्पन विचार रखलनि। अप्पन वक्तव्यमे दुनू गोटे अप्पन भूमिकाक निर्वाह करबाक गप्प कहलनि। राधे भाई कहलनि की, “हम सभ त’ विगत दू दशकसँ मैथिली भाषाक लेल कार्य क’ रहल छी, कार्यक्रम कतौह होए, मुदा अप्पन मैथिलीकेँ प्रमुखतासँ मंच पर स्थान दैत रहल छी। कखनहु काल त’ किछु लोक तमसा सेहो जाइत छथि मुदा हमरा सभ मैथिलीक सम्मानमे कोनो तरहक समझौता नहि करैत छी।’

एहि परिचर्चामें शामिल पंडित अजयनाथ झा शास्त्री हर विषय पर अप्पन बेवाक विचार रखैत राधे भाई आ जुली झा केर भूमिकाकेँ महत्वपूर्ण कहलनि। पंडित अजयनाथा झा शास्त्री अप्पन वक्तव्यमे कहलनि कि, “राधे भाई आ जुली, गीत संगीतक क्षेत्रमे अप्पन पहिचान बनौने छथि आ मिथिले नहि अपितु देश-विदेशक मैथिलक मध्य एकटा चर्चित नाम छथि त’ हिनकर सभक भूमिका स्वतः महत्वपूर्ण भ’ जाइत अछि। ई लोकनि नित, नव-नव स्थान पर कार्यक्रमक लेल जाइत छथि त’ हिनकर सभक आव्हान आओर बेसी कारगर सिद्ध भ’ सकैत अछि”।

तहिना, राधेभाई आ जुली झा एहि विषय पर अप्पन विचार रखैत कहलनि, की “आगू जतेक कार्यक्रम होयत, हम सभ हर मैथिलकेँ जागरूक करब जे जनगणनाक मध्य अप्पन मातृभाषाक रूपमे मैथिली लिखबैथ”।

परिचर्चाक अंत मे सब वक्ता एवं श्रोता लोकनिकें कार्यक्रमक प्रस्तोता मैथिल पुनर्जागरण प्रकाशक प्रबंध संपादक धर्मेंद्र कुमार झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कएल गेल।

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