बेनीपट्टीक लोरिका गाममे शुरू अछि श्री मद्भागवत कथा सप्ताह
मधुबनी । समदिया

भागवत पुराण, कलिकालमे सभ पुराणमे, सर्वाधिक आदरणीय पुराणमेसँ एक अछि, प्राचीन कालहिसँ भागवत पुराण कथा, हिन्दू समाजक धार्मिक, सामाजिक आ लौकिक मर्यादाक स्थापनामे महत्त्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करैत आबि रहल अछि। ई वैष्णव सम्प्रदायक प्रमुख ग्रन्थ अछि, भागवत पुराणमे वेद, उपनिषद तथा दर्शन शास्त्रक गूढ़ एवं रहस्यमय विषयके अत्यन्त सरलताक संग निरूपित कएल गेल अछि। एकरा भारतीय धर्म आ संस्कृतिक विश्वकोश कहब आओर बेसी समीचीन होयत। भक्ति एकटा एहेन निवेश अछि जे, जीवनमे तमाम परेशानीक उत्तम समाधान प्रदान करैत अछि, संगहि जीवनक बाद मोक्ष सेहो सुनिश्चित करैत अछि। एहि तरहक भक्तिपूर्ण विचार कहैत छथि प्रसिद्ध संत आ परमार्थ आश्रम सूरतवासी, श्री श्री १०८ श्री केशवदासजी महाराज परमहंस, जे एखनि मधुबनी जिलांतर्गत बेनीपट्टीक लोरिका गाममे श्रीमद्भागवत कथा कहि रहल छथि।
श्री केशवदासजी महाराज कहैत छथि कि, श्रीमद्भागवत कथा, मनुष्यक तमाम इच्छा पुर्तिक साधन अछि। ई एकटा कल्पवृक्षक समान अछि, भागवत कथा साक्षात कृष्ण अछि, आ जे कृष्ण छथि, वएह साक्षात ईश्वर छथि। भागवत कथा, भक्तिक मार्ग प्रशस्त करैत अछि, एहि कलिकालमे मुक्तिक सबसँ सुगम मार्ग इएह अछि।
अप्पन कथाक क्रममे श्री केशवदासजी महाराज, पांडवक जीवनमे भेल श्रीकृष्णक कृपाकेँ अत्यंत सरल आ सुन्नर ढंगसँ दर्शओलनि अछि। भागवतक कथा, अर्थात भगवानक कथा त’ अछि, मुदा भगवानक कथा, बिनु भक्तकेँ परिपूर्ण नहि अछि। तैं हर शास्त्रमे पुराणमे, भगवानक कथाक संग – संग भक्तक कथा सेहो अबैत अछि। नवधा भक्तिमे, सबसँ पहिल भक्ति, श्रवण मानल जाइत अछि। जे हमरा सभ, कानसँ सुनैत छी, वएह हमरा सभक ह्रदयमे प्रवेश करैत अछि, आ पुनः हम सभ वएह बजैत छी आ वएह करैत छी जे हमरा सभ कथामे सुनैत छी। “जिन्ह हरि कथा सुनी नहीं काना, श्रवण रन्ध्र अहि भवन समाना।”
तैं संतजन, कथा श्रवणक किछु लाभ कहने छथि। पहिल तृष्णा रहित वृति, दोसर अन्तः करणक शुद्धि, तेसर अनन्य भक्ति आ चारिम भक्तसँ प्रीति आदि। श्री केशवदासजी महाराज महाराज अप्पन कथाक क्रममे आगू कहैत छथि कि, श्रीमद् भागवत कथाक श्रवण, मनुष्य जीवनकेँ सार्थक बनबैत अछि। जन्म त’ हर प्राणी एवं मनुष्य लैत अछि, मुदा ओकरा अप्पन जीवनक अर्थ बोध नहि रहैत छैक। बाल्यावस्थासँ मृत्यु धरि ओ सांसारिक गतिविधिमे लिप्त भ’ अप्पन अमूल्य जीवनकेँ नश्वर बना लैत अछि। श्रीमद् भागवत एहेन कथा अछि, जे जीवनक उद्देश्य एवं दिशाकेँ दर्शाबैत अछि। तैं जतय भागवत कथाक आयोजन होइत अछि, त’ कथा सुनला मात्रसॅं ओहि ठामक संपूर्ण क्षेत्र दुष्ट प्रवृत्तिसँ मुक्त भ’ सकारात्मक उर्जासँ सशक्त होइत अछि।
एहि श्रीमद्भागवत कथाक आयोजक गोपाल चौधरी, दिगंबर नाथ झा (यजमान), बिजेंद्र झा, यशोदानन्द मिश्र, बेदानन्द मिश्र, लालमोहन मिश्र, पुरंदर झा, नवल मिश्र, लीलाधर झा, भजन गायक गोपाल झा एवं टीम संगहि तमाम ग्रामवासी सदैव तत्पर रहैत छथि। नवाहक उपरांत एहि भगवत कथाक आयोजनसँ सम्पूर्ण क्षेत्रमें भक्तिपूर्ण वातावरणक निर्माण भेल अछि।
