श्रद्धांजलि

नहिं रहलाह ‘चिट्ठी आई है..’ ‘चांदी जैसा रंग है तेरा..’ गजल गायक पंकज उधास

नई दिल्ली
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प्रसिद्ध गजल गायक पंकज उधास आब हमरासभक बीच नहिं रहलैथ। दीर्घ बीमारीक बाद ७२ वर्षक आयुमे ओ अन्तिम सांस लेलनि। हुनकर बेटी नायाब सोशल मीडियाक माध्यमसँ हुनक मृत्युक सूचना देलनि। सोशल मीडिया पर हुनक प्रियजन नम आँखिसँ हुनका श्रद्धांजलि अर्पित कऽ रहल छथि।

पंकज उधासकेँ हिन्दी फिल्म ‘नाम’क गीत ‘चिट्ठी आई है’ सँ एकटा नव पहचान भेटल। हुनक गजल सदिखन बहुत प्रसिद्धि प्राप्त कयने अछि। चाहे ओ ‘चान्दी जैसा रंग है तेरा’ वा ‘एक तरफ उसका घर एक तरफ मयकदा’, उधासक गजल सबसँ बेसी पसन्द कयल गेल।

हिन्दी सिनेमामे सेहो पंकज उधास द्वारा गाओल गेल गीत सबहक जुबान पर छल। ना कजरे की धार…, रिश्ता तेरा मेरा सब है…, और भला क्या मांगू मैं रब से…, मत कर इतना गुरुर…। लोक एखनो एहि तरहक गीत गुनगुनाबैत छथि।

पंकज उधासक जन्म १७ मई १९५१ केँ गुजरातक जेतपुरमे भेल छल। हुनकर जन्म एकटा जमींदार परिवारमे भेल छलनि। हुनक दादा भावनगर राज्यक दीवान छलाह। पंकज उधासक पिता सरकारी कर्मचारी छलाह। हुनक माता जीतूबेन उधासकेँ सङ्गीतक बहुत शौक छलनि। एहन स्थितिमे हुनक पूरा परिवारमे वातावरण संगीतक छल आ सभ भायकेँ सेहो सङ्गीतमे रुचि छल।

पंकज उधासक विषयमे कहल जाइत अछि जे ओ गायनकेँ कहियो अपन पेशा नहिं बनबय चाहैत छलाह। परन्तु, चूँकि पङ्कजक बाल्यकालसँ सङ्गीतक प्रति प्रवृत्ति छल, ओ समयक सङ्ग एकरा अनुकूल बनबैत रहलाह। एक बेर स्कूलक कार्यक्रममे हुनका गायनमे पुरस्कारक रूपमे ५१ रुपया भेटलनि, जे हुनक पहिल कमाई छल।

पंकजक भाय मनहर उधास आ निर्जल उधास सङ्गीतक दुनियामे पहिनेसँ सुप्रसिद्ध नाम छलाह। एहन स्थितिमे पंकज उधासक माता-पिता हुनका राजकोटक सङ्गीत अकादमीमे नामांकित कयलनि। ओ जनैत छलाह जे ओ एहि क्षेत्रमे बेसी नीक प्रदर्शन कऽ सकैत छथि। बॉलीवुडमे लम्बा संघर्षक बादो पंकजकेँ काज नहिं भेटल। ताबत धरि ओ कतेको पैघ स्टेज शो कऽ चुकल छलाह। ओ पहिल फिल्म ‘कामना’मे अपन आवाजमे गओलनि मुदा फिल्म फ्लॉप भऽ गेल आ पंकज एकरा कारण बेसी प्रसिद्धि नहिं पाबि सकल। एहिसँ आहत भऽ ओ विदेश जा कऽ रहबाक निर्णय लेलनि।

पंकज उधासकेँ विदेशमे बहुत प्रसिद्धि भेटल आ ओतय हुनक आवाजकेँ नीक जकाँ पहचानल गेल। तखन हुनका प्रसिद्ध अभिनेता राजेन्द्र कुमारक फोन आयल आ हुनक आवाजसँ प्रभावित भऽ हुनका एकटा गीत गयबाक सिफारिश कयलनि आ फिल्ममे कैमियो करबाक विषयमे सेहो पूछलनि। पंकज तखन मना कए देलखिन। राजेन्द्र कुमार जखन मनहर उधासकेँ ई बात कहलनि तखन ओ पङ्कजसँ एहि विषयमे गप्प कयलनि। एकर बाद ओ फिल्म ‘नाम’मे ‘चिट्टी आई है’ केँ अपन आवाज देलनि।
राजेन्द्र कुमार जखन ई गजल अपन परम मित्र राज कपूरकेँ सुनओलनि तखन ओ कानि पड़लाह। गजल गायनक प्रति हुनक प्रेम एतयसँ बढ़ल आ तखन ओ एकरा लेल उर्दू सीखलनि।

११ फरवरी १९८२केँ पंकज उधास फरीदासँ विवाह कयलनि। दुनूक भेँट एकटा सामान्य मित्रक विवाहमे भेल छल। पंकज तखन पढ़ैत छलीह आ फरीदा एयर होस्टेस छलीह। तखन दुनूक बीच मित्रता भेल आ ई मित्रता प्रेममे बदलि गेल। पंकज आ फरीदा विवाह करय चाहैत छलाह। पंकज उधासक परिवार एहि पर आपत्ति नहिं कयलक, मुदा फरीदाक परिवार एहि सम्बन्धकेँ स्वीकार नहिं कयलक। पंकज स्वयं फरीदाक घर अपन विवाहक विषयमे गप्प करबाक लेल गेलाह आ फेर फरीदाक परिवारक सदस्यक अनुमोदनसँ दुनूक विवाह भऽ गेल। हुनकर दूटा बेटी नायाब आ रेवा अछि।

मीडिया रिपोर्टक अनुसार, पंकज उधास, जे अपन पहिल आय ५१ रुपैया कयने छलाह, अपन परिवारक लेल २५ करोड़सँ बेसीक सम्पत्ति छोड़ि गेलाह। पंकज उधासकेँ २००६मे पद्मश्रीसँ सम्मानित कयल गेल छल। ओ हिन्दी आ अन्य भाषामे बहुत रास हिट गीत गयने छथि।

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