बारहम दिनक ऑनलाइन कार्यक्रममे पारंपरिक गीत स्मृतिकेँ कयलक तरोताजा
निज । समदिया

मिथिलाक्षर पक्षक मंगल, ०६ अक्टूबरकेँ मिथिलाक्षर साक्षरता अभियानक १३म स्थापना दिवसक उपलक्ष्यमे जारी ऑनलाइन कार्यक्रममे बारहम दिन पारंपरिक गीतक रहल जे स्मृतिकेँ तरोताजा कयलक।
कार्यक्रमक सहभागीगणमे अजय नाथ झा शास्त्री नाशिकसॅं, संरक्षक देवेन्द्र झा फरीदाबादसॅं, डा० विनय कर्ण पटनासॅं, संरक्षक इन्द्रदेव चौधरी दरभंगासॅं, सुधीर यादव दिल्लीसॅं, सुनीता ठाकुर मुम्बईसॅं सम्मिलित भेलथि।
डा० विनय कर्ण कार्यक्रमकेँ आरंभ करैत ‘गाम होए वा शहर मैथिलीमे पढौनीसँ परिणाम चाही’ केर प्रेरणादायक रचनापाठ कयलनि। सुनीता ठाकुर मुम्बईसॅं ‘जगदम्ब आहि अविलम्ब हमर’ भगवतीक गीत गउलनि।
इन्द्र देव चौधरी ‘जय जय भैरव, सिया सुकुमारी, केसरी अंजन पुत्र हनुमान यौ, जटा-जटिन गीत हे रौ जटा, भाउगीत आदि अनेक पारंपरिक गीत गाबि स्मृतिकेँ तरोताजा कयलनि।
सुधीर यादव अनेको विद्यापति गीत सुमधुर पारंपरिक स्वरमे गओलनि, जाहिमे ‘बड़ सुख सार पाउल तुअ तीरे’, ‘छोटि सुकमारि सिया’, रुसि चलली गौरी,’ आदि गीत छल। शास्त्रीक ‘दौड़ू-दौड़ू यौ हनुमान’ द्रवित कयलक। संरक्षक देवेन्द्र झा’क हास्य चुटकुला जारी रहल।
कार्यक्रम सोशल मीडिया पर ‘मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’क माधृयमसँ लाइव चलि रहल छल।जाहिमे श्रोता गणक सुंदर-सुंदर कामेंट उत्साहित करयवाला छल।
