मैपुप्र केर ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चामे जनसंख्यामे मैथिली मातृभाषा लिखाबय पर जोर आ कार्ययोजना

निज समदिया!! मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश राष्ट्रीय मैथिली दैनिकक ‘ऑनलाइन चर्चा-परिचर्चा’क दोसर एपिसोडमे कतेको गिरह खुजल आ समाधानक कतेको बिजलौका चमकल। मुख्य रुपसँ मिथिलावासी जनगणनाक मातृभाषा काॅलममे मैथिली लिखाबथि, ताहि लेल प्रेरणा जगाबय केर कार्ययोजना पर बल देल गेल। प्राथमिक वर्गक पढ़ौनीक माध्यम मैथिली एवं किछु अन्य संबंधित विषय पर सेहो चर्चा भेल।
मैथिली मंचक चर्चित आवाज कमलाकान्त झा कहलनि जे जँ अपन मातृभाषाक प्रति दरेग नहिं रहत तऽ अस्तित्व नहिं बाँचत। अनेको भाषा विलुप्त भऽ गेल अछि। तेँ जनगणनामे मातृभाषामे समस्त मिथिलावासी मैथिली लिखाबथि, ताहि लेल एक्टिविस्ट तैयार करय पड़त, पंचायत बल्कि बूथ स्तर पर मिथिलावासीमे प्रेरणा जगाबय केर काज करय पड़त। एकटा एक्टिविस्ट कमसँ कम दस परिवारक जिम्मा लेथि। ओ किछु षड्यंत्र दिसि सेहो ध्यान केंद्रित कयलथि, तें प्रगणक संग एक्टिविस्ट रहथि आ हस्ताक्षर करयसँ पहिने मातृभाषाक काॅलममे मैथिली लिखल अछि से देखलाक बादे हस्ताक्षर करथि। ओ कहलनि जे सभ ठामक संस्था सभ जिम्मा बाँटि ई काज करथि। ओ प्राथमिक वर्गक पढ़ौनीक माध्यम मैथिली, डिग्री कॉलेजमे मैथिली सेहो रहय एवं मैथिली अकादमी पटनाक अस्तित्व समाप्त करय केर षड्यंत्र पर सेहो प्रकाश दैत राह देखेलनि।
प्रसिद्ध मैथिलीसेवी ओ साहित्यकार दिलीप कुमार झा एकटा मांजल रणनीतिकार जँका समाधानक सुलझल मार्ग सभ देखेलनि। ओ कहलनि जे एहि बातक जागरण लेल शोसल मिडिया बहुत कारगर होएत। मिथिलाक प्रसिद्ध कलाकार, गायक-गायिका, अभिनेता, अनेको यूट्यूबर सभ, तहिना साहित्यकार, कवि, रचनाकार, रंगकर्मी विशेष रूपसँ शहर, नगर, महानगरक मिथिला-मैथिलक संगठन सभ एवं मिथिला-मैथिलीसँ जुड़ल अनेकानेक प्रकारक भिन्न-भिन्न तरहसँ काज करनाहर सभक समवेत् प्रयास आ पुकार क्रांति आनि देत आ सभठामक मिथिलावासी जनगणनाक काॅलममे मातृभाषामे मैथिली लिखेथिन। आगू ओ कहलनि जे मिथिलाक माटिक रत्न सभ उदित नारायण, मैथिली ठाकुर, प्रिया मल्लिक सभकेँ स्वरुचिसँ आगू अयबाक चाही, मैथिलीजीबी सभकेँ सभसँ पहिने आगू अयबाक चाही।
मैथिल पुनर्जागण प्रकाश द्वारा आयोजित एहि परिचर्चा कार्यक्रममे अपन विचार व्यक्त करैत मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार ओ मैथिली अभियानी प्रीतम कुमार निषाद समस्त मिथिलावासीसँ जनगणनामे मातृभाषाक कालममे मैथिली दर्ज करेबाक अपील कयलनि। प्रीतम निषाद कहलनि जे समाजक अंतिम पाँती धरिक लोक कोना मातृभाषाक कालममे मैथिली दर्ज कराबथि ताहि लेल जागरूकता जगेबाक आवश्यकता अछि। मैथिलीसेवी संस्था ओ मैथिलीक नामपर जीविका चलौनिहार अध्यापक, प्राध्यापक, कलाकार लोकनिक वृहत्तर दायित्व छनि जे ओ सभकें जगाबथि। एहि लेल सब मिलि क’ स़गठित अभियान चलेबाक आवश्यकता अछि।मधुबनीमे मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति एहि दायित्वकें स्वीकार करबाक लेल तैयार अछि।हम मिथिला-मैथिलीक सभ संस्थासँ अपना क्षेत्रमे एहि जागरूकता अभियानकें चलेबाक अपील करैत छी।
सखी-बहिनपा समूहक मधुबनीक संयोजिका छाया मिश्र कहलनि जे मैथिलानी एहिबेर जागि गेल छथि ताहि दुआरे एहि बेर बहुत चिंता करबाक बेगरता नहि अछि। हमसब घर-घर पहुँचबाक प्रयास करब।सखी-बहिनपा एहि अभियानकें पहिनहिसँ आरंभ क’ चुकल अछि।मातृभाषाक संरक्षण ओ समवर्धन सखी-बहिनपाक प्रमुख काज अछि।आबैवला जनगणना जे 1 फरवरीसँ 28 फरवरी धरि सम्पन्न होयत ओहिमे समाजक सभ वर्गक सहयोग लेबाक आवश्यकता अछि। जाहिसँ बेसीसँ बेसी लोक मातृभाषाक कॉलममे मैथिली लिखाबथि। एहिबेर मथिली भाषीक कमसँ कम पाँच करोड़ संख्या दर्ज होय से उपाय हमरा सबकें करबाक अछि।सखी-बहिना अहाँसबहक डेगसँ डेग मिलाक’ चलती से हम विश्वास दियाबैत छी।
संचालन अजय नाथ झा शास्त्री कऽ रहल छलथि, अंतमे मैथिली मंचक गौरव कमलाकान्त झा कहलनि, सभ जागल लोककेँ बजा अजय-विजय कयलौंह।
