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बिहारक शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित पोथीमे मैथिली मात्र दरभंगा आ मधुबनीमे, एमएलसी ठाकुर द्वारा सदनमे जोरदार विरोध

पटना समदिया!! मैथिलीक अस्मिताक लेल एमएलसी घनश्याम ठाकुर जोरदार प्रयत्न सदनमे कऽ रहल छथि। मैथिली पत्र-पत्रिकाकें सरकारी सहयोग एवं मिथिलाक विद्यालयक प्राथमिक वर्ग (कक्षा ०१सँ ५/८) मे मैथिलीक माध्यमसँ पढ़ौनीक मांगक बाद काल्हि मंगलकेँ बिहार सरकारक शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित पोथीमे मैथिलीकेँ मात्र दरभंगा-मधुबनी धरि सिमित रखबाक लेल जोरदार विरोध जतौलनि अछि।

घनश्याम ठाकुर कहैत छथि, “मैथिली हमर अस्मिता, गौरव आ पहिचान अछि। एहि विषय पर हम सदनमे निरंतर सशक्त स्वरमे आवाज उठबैत रहब।

काल्हि बिहार विधान परिषद् मे शून्यकालक माध्यमसँ शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक “बिहारक भाषाएँ एवं बोलियक संसार” (लेखिका – आरती गांधी) मे मैथिली भाषा संबंधी अपूर्ण तथ्यक विषय उठेलनि।

सदनमे ओ कहलनि, “उक्त पुस्तकमे ‘बिहारक प्रमुख बोलियक संक्षिप्त परिचय’ शीर्षक अंतर्गत मैथिलीकेँ केवल दरभंगा आ मधुबनी जिला धरि सीमित कएल गेल अछि, जखनकि मैथिली दरभंगा-मधुबनीसँ अतिरिक्त सहरसा, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, समस्तीपुर, बेगूसराय, सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण (बेतिया) सहित अनेको जिलामे व्यापक रूपेँ बाजल आ बूझल जाइत अछि।”

आगू घनश्याम ठाकुर कहलनि,”मैथिली कोनो मात्र बोली नहि, बल्कि भारतीय संविधानक अष्टम अनुसूचीमे सम्मिलित मान्यता प्राप्त भाषा अछि। एकर समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक परंपरा रहल अछि। प्राथमिक कक्षाक पाठ्यपुस्तकमे एकरा सीमित रूपेँ प्रस्तुत करब तथ्यगत रूपेँ अपूर्ण अछि, जाहिसँ छात्र-छात्रा सभमे भाषागत पहिचान संबंधी भ्रम उत्पन्न होएबाक आशंका अछि। अतः हम सरकारसँ मांग करैत छी जे उक्त पुस्तकक तथ्यक सम्यक समीक्षा कए, मैथिली भाषाक वास्तविक भौगोलिक विस्तारकेँ समाहित करैत संशोधित संस्करण प्रकाशित कएल जाए तथा सदनमे स्पष्ट वक्तव्य देल जाए।”

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