शिक्षा

नव शिक्षा नीति २०२० मे मातृभाषामे शिक्षाक माध्यम होयब एकर खासियत अछि : कुलपति प्रो लक्ष्मी निवास पांडेय (कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय)

नव शिक्षा नीति २०२० मे भारतीय संस्कृति, अस्मिता आ गौरवक संग एकर अस्तित्वक बात कयल गेल अछि, मातृभाषामे शिक्षाक माध्यम होयब एकर खासियत अछि, जे विभिन्न भारतीय भाषाक संरक्षण आ संवर्धनमे अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निमाहत : कुलपति प्रो लक्ष्मी निवास पांडेय (कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय)
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दरभंगा समदिया
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नव शिक्षा नीति : 2020, शिक्षामे उदारीकरण आ एकर बहुउद्देशीकरणक सोच केर उजागर करैत अछि। एहि नीतिक अंतर्गत सरकार शिक्षण संस्थान केर स्वायत्तता तऽ देबय चाहैत अछि मुदा ओकरासँ ओ स्वावलंबी बनबाक सेहो उम्मीद करैत अछि आ संस्थान केर स्वावलंबी बनबा लेल चरणबद्ध क्रममे एकटा टारगेट दऽ देल गेल अछि। ई बात ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालयक कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी मंगलदिन सीएम साइंस कॉलेजमे आयोजित संगोष्ठीमे कहलनि।
‘नयी शिक्षा नीति 2020′ केर परिप्रेक्ष्यमे विश्वविद्यालयक स्वायत्तता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठीमे ओ कहलनि जे शिक्षाक नव राष्ट्रीय नीति केर मूल उद्देश्य, शिक्षा केर पहुँच, समानता, गुणवत्ता, वहनीय शिक्षा आ उत्तरदायित्व सन मुद्दा पर केन्द्रित भऽ मातृभाषा केर सहयोगसँ शिक्षा केर सहज, सुबोध आ सुग्राह्य बनायब अछि। एहिसँ छात्रमे रचनात्मक आ सकारात्मक दृष्टि, तार्किक निर्णय लेबाक क्षमता आ नवाचार केर भावनाक विकास होयत।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति प्रो लक्ष्मी निवास पांडेय कहलनि जे जनक-जानकी केर मातृभूमि मिथिला संस्कार आ संस्कृतिक धरती रहल अछि। उत्तम शिक्षा अदौंसँ एहिठामक परंपरा रहल अछि। नव शिक्षा नीति 2020 मे भारतीय संस्कृति, अस्मिता आ गौरव केर संग एकर अस्तित्वक बात कयल गेल अछि। मातृभाषामे शिक्षाक माध्यम होयब एकर खासियत अछि। जे विभिन्न भारतीय भाषाक संरक्षण आ संवर्धनमे अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निमाहत। ओ कहलनि जे राष्ट्रीय शिक्षा नीतिमे सन्निहित नीति केर समुचित क्रियान्वयन लेल शिक्षकक नियुक्तिमे विश्वविद्यालय केर स्वायत्तता देल जायब जरूरी अछि।
मुख्य वक्ता केर रूपमे कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालयक पूर्व कुलपति प्रो शशि नाथ झा कहलनि जे राष्ट्रीय शिक्षा नीतिमे नीति केर निर्धारण आ नियुक्तिक अधिकार विश्वविद्यालय केर नहि देल गेल अछि। फेर स्वायत्तता केर पूर्ण नहिं कहल जा सकैछ। ओ कहलनि जे विभिन्न शिक्षण संस्थानमे पुरान लोक लगातार सेवानिवृत भऽ रहल छथि मुदा नव नियुक्ति सरकारक हुकुमक बाट जोहबा लेल मजबूर अछि। नव शिक्षा नीतिमे मातृभाषामे शिक्षाक गप्प केर प्रमुखतासँ शामिल कयल गेल अछि मुदा मातृभाषाक शिक्षकक नियुक्तिमे कोताही बरतल जायब चिंताक विषय अछि। ई केहन विडंबना अछि जे विभिन्न शिक्षण संस्थानमे शिक्षकक अभावमे तमाम वर्ग खाली पड़ल अछि। मुदा शिक्षकक नियुक्ति नहिं भऽ पाबि रहल। जखनकि सदनमे जँ एकटा सीट खाली भऽ जाय तऽ लगैछ जेना संविधान खतरामे पड़ि जायत आ आनन फाननमे चुनावी प्रक्रिया पूरा कऽ लेल जाइछ।
अवसर पर बेनीपुरक विधायक प्रो विनय कुमार चौधरी कहलनि जे विश्वविद्यालयक संचालनमे स्वायत्तता केर कहियो कोनो कमी नहिं रहल अछि। खासकऽ बिहारक विश्वविद्यालयमे स्वायत्तता सदतिसँ बढ़ि-चढ़िकऽ रहैत आयल अछि। मुदा एहि स्वायत्तता केर सिस्टम स्वतंत्रतामे परिणत कऽ एकरा खोखला बना रखने अछि।

एहिसँ पहिने अतिथि लोकनिक स्वागत प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार चौधरी मिथिलाक गौरवशाली परंपरा अनुरूप पाग, चादर, मखानाक माला आ मिथिला चित्रकला प्रदान कय कयलनि। अपन संबोधनमे ओ महाविद्यालयक विभिन्न गतिविधिक विस्तारसंँ चर्चा करैत नव शिक्षा नीतिमे विश्वविद्यालय केर स्वायत्तता देल जयबाक समर्थन करैत कहलनि जे विश्वविद्यालय केर स्वायत्तता भेटलासँ प्रशासनिक, शैक्षणिक आ एकरा अंतर्गत आबय बला संस्थान केर विकास लेल सभ तरहक निर्णय लेबामे आसानी होयत। आ एकर लाभ शिक्षासँ जुड़ल सभ हितकारककेँ समान रूपसँ भेटि सकत। काॅलेजक पूर्व छात्रा सुष्मिता झा केर संचालनमे आयोजित कार्यक्रममे विभिन्न महाविद्यालयक प्रधानाचार्य, शिक्षक, विश्वविद्यालयक अनेक पदाधिकारी, स्नातकोत्तर विभागक अध्यक्ष एवं शिक्षक संग अनेक गणमान्य लोक उपस्थित छलाह। एहि अवसर पर कुलपतिक कर कमलसँ परिसरमे नव निर्मित पीजी ब्लॉकक उद्घाटन आ पौधारोपण सेहो कयल गेल।

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