विधि-व्यवस्था

सनातन धर्म पर विवादास्पद टिप्पणीक लेल सुप्रीम कोर्टक स्टालिनकेँ फटकार

कहलक छथि, पता हेबाक चाही अंजाम
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नई दिल्ली
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तमिलनाडु सरकारक मंत्री आ सीएम एमके स्टालिनक बेटा उदयनिधि स्टालिनकेँ सोमदिन सर्वोच्च न्यायालय कड़ा फटकार लगेलक। उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्मक विषयमे एकटा विवादास्पद बयान देने छल। ओ सनातन धर्मकेँ मिटाबय केर बात कहने छलथि। मामिलाक सुनवाई करैत सर्वोच्च न्यायालय स्टालिनसँ कहलक, “अहाँ आम आदमी नहिं छी। अहां मंत्री छी। अहांकेँ परिणाम पता हेबाक चाही।”
“अहां संविधानक अनुच्छेद १९ (१) (ए) केर उल्लंघन कयलहुँ। की अहां अपन शब्दक परिणामसँ अनभिज्ञ छी ? अहां साधारण आदमी नहिं छी। अहां मंत्री छी। अहांकेँ एकर परिणामक पता हेबाक चाही। सर्वोच्च न्यायालय कहलक जे स्टालिन अपन अभिव्यक्ति स्वतन्त्रताक अधिकारक दुरुपयोग कयलनि। अदालत स्टालिनक ओकीलसँ पुछलक जे अहाँ एहि मामिलामे सोझे सर्वोच्च न्यायालयमे किएक आयल छी ? न्यायमूर्ति संजीव खन्ना आ न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ताक पीठ एहि मामिलाक सुनवाई कयलक।

२ सितंबर, २०२३ केँ उदयनिधि स्टालिन ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’मे सनातन धर्मक तुलना डेंगू आ मलेरिया सन रोगसँ कयलक। ओ कहलक जे एकरा विरोधक नहिं, बल्कि समाप्त करबाक जरूरत अछि। उदयनिधि स्टालिन कहने छलाह, “किछु चीजक विरोध नहिं कयल जा सकैत अछि, ओकरा मात्र समाप्त करबाक चाही।” डेंगू, मच्छर, मलेरिया आ कोरोनाक हम विरोध नहिं कए सकैत छी। हमरा एकरा समाप्त करए पड़त। तहिना हमरा सनातनकेँ सेहो मिटबय पड़त।”

उदयनिधि स्टालिनक विरुद्ध सनातन धर्मक विरुद्ध देल गेल वक्तव्यक लेल कतेको राज्यमे मोकदमा दायर कयल गेल अछि। स्टालिन सर्वोच्च न्यायालयमे एकटा याचिका दायर कयने छथि जाहिमे अनुरोध कयल गेल अछि जे हुनक विरुद्ध दर्ज कयल गेल सभटा एफ.आई.आर.केँ एक सङ्ग जोड़ल जाय। एहि मामिलाक अगिला सुनवाई १५ मार्चकेँ होएत।

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