संपादकीय

आखिरकार श्रीराम जन्मभूमि अयोध्यामे आइ विराजमान भऽ रहलाह रामलला 

लगभग पाँच सय सालक संघर्ष पर एकटा संक्षिप्त दृष्टि

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कुन्दन आनंद झा, मधुबनी

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“ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट्समत्ययु:।

ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ।।

नक्षत्रेऽदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पञ्चसु।

ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह।।

प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम्।

कौसल्याऽजनयद्रामं सर्वलक्षणसंयुतम्।।

विष्णोरर्धं महाभागं पुत्रमैक्ष्वाकुवर्धनम्।”

अर्थात पुत्रेष्टि यज्ञ समाप्त भेलाक लगभग एक वर्षक बाद, चैत्र मासक शुक्ल पक्षक नवम दिन, रामक जन्म भेल छल। ई दिन पुनर्वसु नक्षत्र छल। रामक जन्म कर्क लग्नमे भेल छल, जखन बृहस्पतिक सङ्ग चन्द्रमा, सूर्य, मंगल, शुक्र आ शनि सन पाँच ग्रह अपन उच्च स्थितिमे छलाह। ओही समय पुष्य नक्षत्रमे मीन लग्नमे भरतक जन्म भेल छल।

परम्परागत रूपसँ रामक जन्म त्रेता युगमे मानल जाइत अछि।

४९१ साल पहिने शुरू भेल विवादक समापनक बाद आई अयोध्यामे श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राम मंदिरमे रामललाकेँ प्राण प्रतिष्ठाक कार्यक्रम भऽ रहल अछि। एहि अवसर पर भारतक संग पूरा विश्वक नज़रि एहि पर अछि। रामललाक मूर्तिक चयन भऽ चुकल अछि। मैसूरक मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा बनाओल गेल 51 इंचक रामलला मूर्तिकेँ पहिनेसँ गर्भगृहमे आनल जा चुकल अछि। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रममे प्रधानमंत्रीक अलावा देश भरिसँ लाखों विशेष अतिथि आयोध्यामे उपस्थित छथि। एहि कार्यक्रमक समापानक पश्चात आम जन सेहो भव्य मन्दिरक दर्शन कय सकैत छथि।

राम मंदिरक इतिहास पर एक नजरि :-

साल 1528 मे एहि स्थान पर बाबरी मस्जिद के निर्माण मुग़ल सम्राट कमांडर मेरे बाकी करवेने छल। साल 1885 मे पहिल बेर महंत रघुवरदास एहि मंदिरकेँ पुनः निर्माणक लेल फैजाबाद अदालतमे अपील केलथि। साल 1949 मे विवादित ढांचाक बाहर केंद्रीय गुम्बदक नीचाँ रामललाक मूर्ति प्रकट भेल। तकर बादसँ लोकसभ ओहि ठाम पूजा अर्चना केनाइ शुरू केलथि। साल 1950 मे गोपाल सिंह विशारद फैजाबाद न्यायालयमे मुकदमा दायर केलथि आ पूजाक मांग केलथि। एहि केसक बाद मंदिरमे हिन्दूक पूजा अर्चनाक अधिकार भेटल। एहि साल परमहंस रामचंद्र दास पूजा आ मूर्तिकेँ रखबाक लेल फैजाबाद कोर्टमे मुकदमा दायर केलथि। परमहंसक एहि डेगसँ राम मंदिरक आंदोलनकेँ नव दिशा भेटल। साल 1959 मे निर्मोही अखाड़ा विवादित स्थल पर कब्ज़ा लेल मुकदमा दायर केलक। 1961 मे मोहम्मद हाशिम मुसलमानसभकेँ सम्पत्ति बहाल करबाक माँग करैत मुकदमा दायर कयलनि। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ मस्जिदक दावा करैत एकटा मामिला दायर कयलक, आ तर्क देलक जे लगपासक क्षेत्र कब्रिस्तान छल।

1984 मे विश्व हिन्दू परिषद आन्दोलन जारी रखबाक लेल एकटा समूहक गठन कयलक, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणीकेँ अभियानक नेता बनाओल गेल।

साल 1986 मे फैजाबाद जिला न्यायाधीश आदेश देलनि जे हिन्दू लोकनिक प्रार्थना करबाक लेल संरचनाक द्वार खोलि देल जाय। एकर तुरन्त बाद बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटीक गठन कयल गेल। 1986 मे फ़रवरी केर प्रथम दिन स्थानीय अदालत हिन्दूक पूजा लेल ओहि स्थान केल खोलबाक आदेश देलक। 1989 मे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी संरचनाक लग एकटा निर्विवाद स्थल पर शिलान्यास या भूमिपूजन समारोहक अनुमति देलनि। बादमे मामिलाक सुनवाई उच्च न्यायालयमे स्थानान्तरित कऽ देल गेल। साल 1989 मे 14 अगस्तकेँ इलाहाबाद हाईकोर्ट एहि मामिलाक यथास्थिति रखबाक आदेश देलक।

25 सितंबर, 1990 आडवाणी देशव्यापी एहि मुद्दाक समर्थन जुटाबय लेल सोमनाथसँ अयोध्या धरि रथयात्रा शुरू कयलनि। नवम्बर 1990 मे आडवाणीक रथकेँ रोकल गेल आ हुनका बिहारक समस्तीपुरमे गिरफ्तार कऽ लेल गेल। एहि घटनाक्रमसँ असंतुष्ट भाजपा वीपी सिंह सरकारसँ अपन समर्थन वापिस लऽ लेलक, जाहिसँ नव चुनाव शुरू भऽ गेल। भगवा पार्टी विधानसभा चुनावमे बहुमत प्राप्त कऽ पैघ प्रगति कयलक।

३० अक्टूबर १९९० केँ तत्कालीन राज्य सरकारक मुखिया मुलायम सिंह यादवक आदेश पर कारसेवक पर चलाओल गेल गोलीमे आधिकारिक सूचना अनुसार पाँच गोटे केर मृत्यु भेल छल।

6 दिसम्बर 1992 कारसेवक द्वारा विवादित संरचनाकेँ गिरा देल गेल आ ओकर स्थान पर एकटा अस्थायी मन्दिर बनाओल गेल। तखनि पीवी नरसिम्हा रावक नेतृत्ववला कांग्रेस सरकार यथास्थितिक लेल अदालतमे चलि गेल।

5 मार्च 2003 इलाहाबाद उच्च न्यायालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षणकेँ विवादित स्थलक खुदाई करबाक आदेश देलक जाहिसँ ई निर्धारित कयल जा सकय जे जतय मस्जिद ठाढ़ छल ओतय कोनो मन्दिर अछि कि नहिं।

22 अगस्त 2003 एएसआई इलाहाबाद उच्च न्यायालयमे अपन रिपोर्ट प्रस्तुत करैत कहलक जे ओकरा मस्जिदक स्थलक नीचा दसम शताब्दीक मन्दिरक विशेषता भेटल।

31 अगस्त 2003 ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कहलक जे ओ एएसआई रिपोर्टकेँ चुनौती देत। 26 जुलाई, 2010 पीठ अपन फैसला सुरक्षित राखि लेलक आ सभ पक्षकेँ एहि मुद्दाकेँ सौहार्दपूर्ण ढंगसँ हल करबाक सलाह देलक।

8 सितंबर 2010 उच्च न्यायालय घोषणा केलक जे फैसला 24 सितंबरकेँ सुनायल जायत। 14 सितंबर 2010 फैसलाकेँ स्थगित करबाक लेल एकटा रिट दायर कयल गेल छल मुदा बादमे उच्च न्यायालय एकरा खारिज कऽ देलक।

30 सितंबर 2010 केँ इलाहाबाद उच्च न्यायालय आदेश देलक जे 2.77 एकड़ विवादित स्थलकेँ हिन्दू, मुसलमान आ निर्मोही अखाड़ाक बीच तीन भागमे बाँटल जाय। महंत सुरेश दास, सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ, निर्मोही अखाड़ा, अखिल भारत हिन्दू महासभा, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द आ अन्य द्वारा दायर याचिका फैसलाकेँ चुनौती देलक। उच्च न्यायालयक फैसलाकेँ चुनौती देबाक लेल रामललाक दिससँ एकटा याचिका सेहो दायर कयल गेल छल। एहि मामिलामे सर्वोच्च न्यायालय विवादित स्थलकेँ तीन भागमे विभाजित करबाक उच्च न्यायालयक आदेशपर रोक लगा देलक।

23 सितंबर कोर्टसँ बाहर समझौताक याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुँचल आ सर्वोच्च निकाय कहलक जे ओ 28 सितंबरकेँ फेरसँ सुनवाई करब।

28 सितंबर सर्वोच्च न्यायालय स्थगित करबाक याचिका खारिज कऽ देलक आ इलाहाबाद उच्च न्यायालयकेँ फैसला देबाक अनुमति देलक। उच्च न्यायालय 30 सितंबरकेँ फैसलाक दिन चुनलक।

30 सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय बहुत दिनसँ चलि आबि रहल अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दा पर अपन फैसला सुनाबैत विवादित क्षेत्र के सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा आ पार्टीक बीच ‘रामलला’ के लेल तीन तरफा बंटवाराक फैसला देलक।

26 फरवरी, 2016 सुप्रीम कोर्ट ध्वस्त विवादित ढांचा केर जगह पर राम मंदिरक निर्माणक मांग करय वला अपन याचिकाक संग भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामीकेँ अयोध्या विवादसँ जुड़ल लंबित मामलामे हस्तक्षेप करय केर अनुमति देलक।

अयोध्या विवाद पर नवम्बर 2019 मे विराम लागल आ अंतिम फैसला आयल। फैसलाक तहत, विवादित 2.77 एकड़ जमीन राम मन्दिरक निर्माणक लेल भारत सरकार द्वारा स्थापित एकटा ट्रस्टकेँ हस्तांतरित कऽ देल गेल। नवम्बर 2019 मे सुप्रीम कोर्टक पांच न्यायाधीशक पीठ विवादित जमीनकेँ राम जन्मभूमि मंदिरक निर्माणक लेल एकटा ट्रस्ट केर सौंपय केर आदेश देलक। अदालत सरकारकेँ मस्जिद बनयबाक लेल सुन्नी वक्फ बोर्डकेँ दोसर स्थानपर पाँच एकड़ जमीन देबाक निर्देश सेहो देलक। फलस्वरूप, फरवरी 2020 मे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्रक स्थापना कयल गेल छल, जाहिमे 15 न्यासी शामिल अछि जे वित्तपोषणक संग संग पवित्र स्थलक निर्माणक देखरेख करताह। 05 अगस्त 2020 मे आधारशिला (भूमि पूजा) रखलाक तीन सालसँ बेसी समय बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आई मन्दिरक प्राण-प्रतिष्ठा समारोहमे भाग लेताह। एहि ऐतिहासिक फैसला देनिहार सर्वोच्च न्यायालयक पाँचटा न्यायाधीशकेँ आजुक समारोहकेँ प्राण-प्रतिष्ठा समारोहमे आमंत्रित छथि। पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोबडे आ वर्तमान प्रधान न्यायाधीश डीवाई चन्द्रचूड़क संग न्यायमूर्ति अशोक भूषण आ अब्दुल नजीर आमंत्रित छथि।

मंदिर 20 फ़ीट लम्बा आ 20 फीट चौड़ा अछि, 1000 श्रद्धालु एक संगहि गर्भगृहमे ठाढ़ भऽ सकैत छथि। गर्भगृह लग परकोटा तीन दिस खुजत। मंदिरमे प्रवेश द्वार दूटा अछि, मंदिरक आसपासक 3 किलोमीटरक वृत्तमे जे क्षेत्र अछि से रेड जोन कहलायत।

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