जनसरोकार

ई-चालान नहि भरला पर बिजली बिलसँ जोड़बाक सुझाव, वाहन-लाइसेंस पर कार्रवाईक संकेत

नई दिल्ली । समदिया

ट्रैफिक नियम तोड़लाक बाद बकाया ई-चालान नहि भरनिहार लोकनि पर सख्त कार्रवाईक उपाय पर सुप्रीम कोर्ट विचार करबाक सुझाव देलक अछि। सोमदिन जस्टिस जेबी पारदीवाला आ जस्टिस केवी विश्वनाथनक पीठ एस. राजसीकरन बनाम भारत संघ मामिलाक सुनवाइ करैत छल।

अदालत कहलक जे केवल पैघ संख्यामे ई-चालान जारी कएनाइ पर्याप्त नहि, असल चुनौती जुर्मानाक रकम वसूल करब अछि। पीठ सुझाव देलक जे बकाया चालानक रकम बिजली बिलसँ जोड़बाक व्यावहारिक उपाय पर विचार कएल जा सकैत अछि।

अदालत वाहनसँ जुड़ल किछु सेवा सेहो बकाया चालानसँ जोड़बाक सुझाव देलक। एहिमे आरसी नवीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण, डुप्लीकेट आरसी, फिटनेस आ पीयूसी प्रमाणपत्र तथा ड्राइविंग लाइसेंस नवीकरण पर रोक लगेनाइ शामिल अछि। बकाया चालानवला वाहनकेँ परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करबाक आ सड़क पर रैंडम चेकिंगक माध्यमसँ कार्रवाई करबाक सुझाव सेहो देल गेल।

करीब 45 हजार करोड़ रुपया बकाया

सुनवाइक दौरान अदालतकेँ बताओल गेल जे राज्य आ केंद्रशासित प्रदेशसभमे करीब 45 हजार करोड़ रुपयाक ई-चालान बकाया अछि, जाहिमे सँ करीब 25 हजार करोड़ रुपयाक वसूली भऽ चुकल अछि।

पीठ एहि बात पर सेहो चिंता जतौलक जे करीब 14 वर्षसँ सड़क सुरक्षासँ संबंधित निर्देश देल जा रहल अछि, मुदा तकर जमीन पर पालन केहन अछि। अदालत वरिष्ठ अधिवक्ता आ अमिकस क्यूरी गौरव अग्रवालकेँ निर्देशसभक स्थिति दर्शाबैत चार्ट तैयार करबाक लेल कहलक।

ई मामिला वर्ष 2012 मे कोयंबटूरक ऑर्थोपेडिक सर्जन एस. राजसीकरन द्वारा दायर जनहित याचिकासँ जुड़ल अछि। मामिलामे सड़क सुरक्षा, दुर्घटना कम करब, बेहतर आधारभूत संरचना आ दुर्घटना पीड़ितकेँ सहायता उपलब्ध कराबय संबंधी उपाय पर सुप्रीम कोर्टमे सुनवाइ चलि रहल अछि।

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