राजनीति

भारत FCRA विधेयक पर वैश्विक समुदायकेँ देलक भरोसा, भ्रांतिसँ दुर करैत कयलक वास्तविकता स्पष्ट

नई दिल्ली । समदिया

प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 केँ लऽ कऽ भारतमे राजनीतिक बहस तेज अछि। अमेरिका सहित किछु यूरोपीय देशक नेतासभ द्वारा सेहो विधेयक पर प्रश्न उठाओल गेल अछि। एहि पृष्ठभूमिमे भारत सरकार विधेयकसँ जुड़ल भ्रांति आ वास्तविकताकेँ वैश्विक समुदायक समक्ष स्पष्ट करबाक प्रयास कएलक अछि।

सरकारक पक्ष वैश्विक स्तर पर राखबाक जिम्मेवारी अमेरिका स्थित भारतीय राजदूत विनय क्वात्राकेँ देल गेल अछि। क्वात्रा स्पष्ट कएलनि जे प्रस्तावित FCRA संशोधन कोनो विशेष धर्म अथवा समुदायकेँ लक्ष्य कऽ कऽ नहि बनाओल गेल अछि।

कोनो समुदाय अथवा धर्मक विरुद्ध नहि अछि FCRA

भारतक अनुसार विदेशी धनक प्रवाह आ सार्वजनिक तथा राजनीतिक क्षेत्रमे विदेशी योगदानक नियमन राष्ट्रीय सुरक्षा आ पारदर्शितासँ जुड़ल संप्रभु विषय अछि। आधुनिक लोकतांत्रिक देशसभमे एहि प्रकारक कानून पहिनेसँ मौजूद अछि।

 

अमेरिकामे 1938 सँ FARA आ 2010 सँ FATCA लागू अछि। ऑस्ट्रेलियामे 2018, कनाडामे 2024 आ ब्रिटेनमे जुलाई 2025 सँ एहि प्रकारक प्रावधान लागू भेल अछि। यूरोपीय संघ सेहो एहि दिशा मे कानून बना रहल अछि।

विदेशी दान पर रोक नहि, प्रक्रियाक पालन जरूरी

भारत सरकारक कहब अछि जे FCRA, 2026 क उद्देश्य NGO अथवा सिविल सोसायटीक विदेशी सहायता बंद करब नहि अछि। भारतमे पहिल FCRA 1976 मे लागू भेल छल। 2010 मे एकरा आधुनिक स्वरूप देल गेल आ 2016, 2018 तथा 2020 मे संशोधन कऽ व्यवस्थाकेँ मजबूत कएल गेल।

प्रस्तावित 2026 विधेयकमे अधिक पारदर्शिता, बेहतर शासन आ स्पष्ट नियम पर जोर देल गेल अछि। कानूनक पालन करऽवला संगठन स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, शोध आ मानवीय कार्य लेल विदेशी सहायता प्राप्त कऽ सकैत अछि।

विदेशी योगदानमे भेल वृद्धि

सरकारक अनुसार FCRA-पंजीकृत संगठनसभकेँ भेटऽवला विदेशी योगदान 2010-11 मे लगभग 1.2 अरब डॉलर छल, जे 2024-25 मे बढ़ि कऽ 2.67 अरब डॉलर भऽ गेल। देशमे 30 लाखसँ बेसी NGO होएबाक अनुमान अछि, मुदा करीब 14,450 संगठन मात्र FCRA पंजीकरणक अंतर्गत अछि।

सरकारक तर्क अछि जे FCRA विदेशी दान स्वीकार करबाक बाट बंद नहि करैत अछि। संगठनकेँ पंजीकरण कराबऽ, निर्धारित प्रक्रियासँ धन प्राप्त करऽ आ ओकर उपयोगक जानकारी देब आवश्यक अछि।

संपत्ति जब्ती संबंधी आशंका पर सेहो सफाई

विधेयककेँ लऽ कऽ ई आशंका सेहो व्यक्त कएल गेल जे NGO, धार्मिक चैरिटी, पूजा स्थल, अस्पताल आ स्कूलसभक संपत्ति जब्त भऽ सकैत अछि। सरकार एहि आशंकाकेँ निराधार बतौलक।

सरकारक अनुसार पंजीकरण रद्द अथवा सरेंडर भेलाक बाद विदेशी योगदान आ ताहिसँ बनल संपत्ति राज्य सरकारक प्राधिकरणक अधीन जाएबाक व्यवस्था 2010 सँ लागू अछि। 2026 क प्रस्तावित विधेयकमे मात्र संपत्तिक सुरक्षा लेल नामित प्राधिकरणक व्यवस्था जोड़ल जा रहल अछि।

जँ संगठनक FCRA पंजीकरण पुनः बहाल भऽ जाइत अछि, तँ संपत्ति आ अनुपयोगी विदेशी धन वापस करबाक प्रावधान सेहो रहत। पूजा स्थलसँ जुड़ल संपत्तिक लेल अलग सुरक्षा व्यवस्था प्रस्तावित अछि।

धर्म अथवा समुदाय आधारित भेदभाव नहि

भारत सरकार स्पष्ट कएलक अछि जे FCRA सभ संगठन पर समान रूपसँ लागू होइत अछि। ई कोनो खास धर्म, समुदाय अथवा विचारधाराकेँ लक्ष्य नहि करैत अछि। विभिन्न धर्मक संगठन धार्मिक शिक्षा, पूजा स्थल रखरखाव आ धर्मार्थ कार्य लेल विदेशी फंडिंग प्राप्त करैत रहि सकैत अछि, बशर्ते ओ निर्धारित कानूनी प्रक्रियाक पालन करथि।

भारतक तर्क अछि जे विदेशी धनक नियमन लोकतांत्रिक देशसभमे सामान्य व्यवस्था अछि। प्रस्तावित FCRA संशोधनक उद्देश्य विदेशी योगदानमे पारदर्शिता, जवाबदेही आ राष्ट्रीय हितक संरक्षण सुनिश्चित करब अछि।

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