चेतना समिति, पटना द्वारा डॉ. जयमंत मिश्र जन्म–शतवार्षिकी समारोहक भव्य आयोजन

पटना समदिया!! चेतना समितिक विशेष आमंत्रित सदस्य अवधेश झाकेँ माध्यमसँ जनतब भेटल जे चेतना समिति, पटना केर तत्वावधानमे प्रख्यात विद्वान डॉ. जयमंत मिश्र जीक जन्म–शतवार्षिकी अवसर पर मंगलकेँ एकटा अत्यंत गरिमामय समारोहक आयोजन कएल गेल। एहि समारोहमे मिथिला, संस्कृत, हिन्दी आ भारतीय ज्ञान–परंपरासँ जुड़ल अनेक प्रतिष्ठित विद्वान सभ भाग लेलनि आ डॉ. मिश्र जीक बहुआयामी व्यक्तित्व आ कृतित्व पर विस्तारसँ प्रकाश डालल गेल।
समारोहक अध्यक्षता करैत चेतना समिति केर अध्यक्ष विवेकानंद झा कहलनि जे डॉ. जयमंत मिश्र उद्भट विद्वान छलाह। चेतना समिति सदैव एहेन विद्वान सभक जयंती आ स्मृति–समारोह आयोजित करैत आबि रहल अछि।
प्रो. इंद्रकांत झा अपन वक्तव्यमे कहलनि जे डॉ. जयमंत मिश्र हुनकर पीएचडी आ डी.लिट् केर परीक्षक रहल छलाह। ओ अनेक भाषाक मर्मज्ञ छलाह आ विद्यापति जीक संस्कृत ग्रंथ सभक प्रकाशन आवश्यक अछि—एहि पर विशेष बल देलनि। ओ कहलनि जे ओहि समय डी.लिट् केर परीक्षक भेटनाइ बहुत दुर्लभ छल आ हम सभ डॉ. मिश्र जेकाँ विद्वानक “हनुमान” रहल छी।
डॉ. रामानंद झा ‘रमन’ डॉ. जयमंत मिश्रकेँ ज्ञानी गृहस्थ परंपराक सशक्त प्रतिनिधि कहलनि। एहि अवसर पर चेतना समिति द्वारा हुनका ताम्रपत्र प्रदान कए सम्मानित कएल गेल। कहल गेल जे हुनकर रचना मैथिली, संस्कृत, हिन्दी, नेपाली आदि अनेक भाषामे प्रकाशित अछि।
कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय केर कुलसचिव त्रिपाठी कहलनि जे डॉ. जयमंत मिश्र वास्तवमे महाविद्वान छलाह।
आरासँ पधारल आचार्य भारत भूषण पाण्डेय कहलनि जे डॉ. मिश्र जीक जीवनमे ज्ञानक सतत मंथन दृष्टिगोचर होइत अछि। मिथिलाक ज्ञानी गृहस्थ परंपरा—सूर्यवंशी निमिसँ लए कए जनक धरि—केर परंपरा हुनकर जीवनमे साकार भेल। ओ कहलनि जे माता केर कोरामे मैथिली आ पिताक कोरामे संस्कृत भाषा केर संस्कार प्राप्त भेल। डॉ. मिश्र आदि शंकराचार्य जीक जन्मकाल निर्धारणसँ जुड़ल समिति केर सदस्य सेहो रहल छलाह। ओ उदार, महान आ सर्वग्राही व्यक्तित्वक धनी छलाह। हुनकर सुपुत्री इंदिरा सेहो समारोहमे उपस्थित छलथि।
संस्कृत शिक्षा बोर्डक अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा कहलनि जे जयंती मनाबैक तात्पर्य जीवनसँ प्रेरणा ग्रहण करब होइत अछि। किछु लोक पदचिह्न पर चलैत अछि आ किछु लोक नव पदचिह्न बनबैत अछि। संस्कृत आ मैथिली शिक्षाक विस्तार लेल निरंतर प्रयास कएल जा रहल अछि। वेद विद्यालय सभक मान्यता बढ़ाबै, जमीनी स्तर पर कार्य करब आ विद्वान सभक डिजिटल पोर्टल तैयार करबाक योजना पर सेहो प्रकाश डाललनि। ओ जानकारी देलनि जे आगाँ चलि 11 वशिष्ठ सम्मान प्रदान कएल जाएत।
प्रो. रत्नेश्वर मिश्र कहलनि जे डॉ. जयमंत मिश्र जीक भाषण आ व्याख्यान अत्यंत विलक्षण होइत छल। ओ इतिहास, साहित्य आ दर्शन केर संबंध पर प्रकाश डालैत कहलनि जे इतिहास प्रमाणक सीमामे बंधल अछि, जखनकि साहित्य ब्रह्म जेकाँ व्यापक अछि। ओ डॉ. मिश्रकेँ सहज, उदार, अकुंठ श्रद्धावान आ भक्त व्यक्तित्व कहलनि आ शास्त्रीय परंपरा पर हुनकर गहन पकड़ केर उल्लेख कएलनि।
कार्यक्रमक अध्यक्ष आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय केर पूर्व कुलपति शशिनाथ झा कहलनि जे डॉ. जयमंत मिश्र केवल मिथिलेटा नहि, बल्कि संपूर्ण भारतक महा–महोपाध्याय छलाह। काशी जेकाँ महान विद्या–परंपरासँ हुनका सम्मान प्राप्त भेल। ओ परंपरागत आ आधुनिक विद्या—दूनू केर समान रूपसँ प्रकांड विद्वान छलाह।
समारोहमे चेतना समितिक उपाध्यक्ष उमेश मिश्र, मंजू झा, विपेंद्र झा ‘माधव’, संयुक्त सचिव दिनेश चंद्र झा, सतीश चंद्र झा, मनोज कुमार झा, प्रचार सचिव पूजा झा, संगठन सचिव प्रियंका मिश्र, कार्यकारिणी सदस्य आ विशेष आमंत्रित सदस्य सभक उपस्थिति रहल।
कार्यक्रमक सफल संचालन चेतना समितिक सचिव जयदेव मिश्र द्वारा कएल गेल। समारोह विद्वतापूर्ण विमर्श आ भावपूर्ण श्रद्धांजलि संग सम्पन्न भेल। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. इंदिरा झा, डॉ. जयमंत मिश्र जीक पुत्री, द्वारा कएल गेल।
समाद : अवधेश झा
विशेष आमंत्रित सदस्य,
चेतना समिति, पटना
