सालों पहिने मैथिली अकादमीक पदक नियुक्ति पर विनोद नारायण झा’क सदनमे प्रश्न पर गोल-मोल उत्तर दऽ मानू बलात् बैसा देल गेल छल

पटना समदिया!! बिहार विधानसभामे बेनीपट्टीसँ निर्वाचित विधायक विनोद नारायण झा मैथिली अकादमीकेँ पुनः शुरू करबाक प्रस्ताव विधानसभामे सालों पहिने रखने छलथि, जखनि मात्र एकटा पद पर कर्मी अकादमीमे रहि गेल छल, आइ ओहो नहिं रहल आ तालाबंदी भऽ गेल पटनमे मैथिली अकादमीमे। ओहि समय विधानसभाक अध्यक्ष नन्द किशोर यादव हुनक प्रस्तावकेँ ठिकसँ स्वीकार तक नहि कयलनि, जोर देला पर सदनमे चुनाव तकक बात कयलनि।
मैथिली अकादमी पर कयल गेल सवालक उत्तर दैत राज्यक शिक्षा मंत्री सुनील कुमार कहने छलथि जे सरकार सभ भाषाक अकादमी पर पुनः काज होयत आओर ओकरा मजगूत कयल जायत। एकर बाद विनोद नारायण झा कहलनि जे मैथिली अकादमीमे 22 टा पद अछि, जाहिमेसँ मात्र एकटा पद पर बहाली अछि आ 21 पद खाली अछि। जँ मैथिली अकादमी शुरू नहि होयत तँ यूपीएससी आ बीपीएससी केर विद्यार्थीकेँ मैथिलीक किताब उपलब्ध नहि होयत। मुदा विधानसभा अध्यक्ष हुनका जबरदस्ती अपन प्रस्ताव वापस लेबाक दबाब बारम्बार बनेने छलथि आ अंततः विधायक विनोद नारायण झा अपन प्रस्ताव वापस लेबाक घोषणा कयने छलथि।
आइ तालाबंदीक बाद एहि पर समस्त मिथिलावासी आक्रोशित अछि आ सड़क पर निकलय केर चेतौनी दऽ रहल अछि। मिथिला क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं मिथिला-मैथिलीक संगठन सभसँ इकट्ठा आन्दोलन करय केर सोशल मीडिया पर आह्वान कयल जा रहल अछि। सालों पहिलुक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल भऽ रहल अछि। अंदेशा सही निकलल आ पुनः एक बेर मैथिली भाषाकेँ अंधकारमे डालि देबाक प्रयास भेल। ताहि समयक सरकारक सभ आश्वासन झुठ निकलल आ बदसँ बदतर स्थिति भऽ गेल अछि।
लोकक कहब अछि जे, आब सवाल उठैत अछि जे की मैथिली भाषाकेँ पूर्ण रूपेण समाप्त करबाक योजना बिहार सरकार बना चुकल अछि ? बिहारमे मैथिली भाषाक व्यवहार करयवला केर जनसंख्या लगभग 08 करोड़सँ बेसी अछि। आ जँ नेपाल आ पड़ोसी राज्य झारखण्ड तथा देश-दुनियामे रहनिहारकेँ मिला कय बात करि तँ लगभग 12-14 करोड़सँ बेसी लोक मैथिलीभाषा-भाषी छथि। झारखंड तकमे पर्यंत मैथिली भाषाकेँ द्वितीय भाषाक दर्जा सरकार देने अछि।
जनतब देब जे बिहार सरकारक आधिकारीक प्रथम भाषा हिन्दी अछि, मैथिलीकेँ बिहार सरकार कोनो स्थान कतौ नहि देलक। जखनि कि मैथिली भाषाकेँ 92म संविधान संशोधन द्वारा 2003 मे अष्टम सूचिमे जगह भेटल आ 2024 मे भारत सरकार मैथिली भाषामे संविधानक प्रकाशन कयलक। नव शिक्षा नीति 2020 केर अनुसार, प्राथमिक शिक्षामे मातृभाषा अनिवार्य अछि, अर्थात बिहारक चौबिसों जिलावाला मिथिला क्षेत्रक विद्यालयमे प्राथमिक वर्ग (कक्षा ०१ सँ ०५ धरि) मे मैथिली भाषाक माध्यमसँ पढ़ौनीक अनिवार्यता अछि। मैथिलीक अप्पन लिपि छैक जकरा आब पुनः मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान प्रायः व्यवहार पथ पर अग्रसारित कऽ देने अछि। मुदा मैथिलीक प्रति बिहार सरकारक उदासीनता देखु जे नव शिक्षा नीतिक तकक पालन नहि कयल जा रहल अछि।
ताहि समयक सदनक गरमागरम चर्चा पर मिथिलाक्षर साक्षरता अभियानक संस्थापक पं. अजय नाथ झा शास्त्री विधायक विनोद नारायण झाकेँ मजबूतीसँ सदनमे बात राखय केर पुनः सराहना करैत कहलनि, “बिहार सरकारक दादागिरी देखू, ई मैथिली सहित सभकेँ एक्केमे सानय केर बहाना बना कोना गोल-मोल कऽ टारि रहल छल, ओ तऽ विधायक विनोदानंद झा धन्यवादक पात्र छथि जे तथापि बहुत हद तक अपन बातकेँ रखलनि, मुदा लिमिटसँ अधिक नहिं जा सकैत छलथि, फलतः एक तरहें जेना बच्चाकेँ डाॅटिकेँ बैसा देल जाइत छैक तेना बैसा देल गेल। समस्त मिथिलावासीकेँ सोचय पड़त आ विनोदानंद झा एहेन विधायककेँ एक बेर पुकारि संग देबय पड़त, संग देबै, ओहो जनसमर्थन देखताह तऽ आओर आगा बढ़ताह, पुनः ओतहिसँ अपन बातकेँ उठेताह मजबूतीक संग आ सरकारकेँ लताड़ताह जे ओहि समय तऽ बैसा देने रही बलात्, एक संग समस्त मैथिलीक मुख्य मुद्दा सभकेँ लऽ कऽ सड़क पर आबय पड़त, एक संग सभठामक मिथिला-मैथिलीक संगठनकेँ जोर लगाबय पड़त, इएह समय अछि, आब उठय पड़त, सड़क पर निकलय पड़त। मिथिला क्षेत्रीय जनप्रतिनिधिकेँ सेहो जगाबय पड़त।”
ओ आगू कहलनि जे सदनमे मैथिलीमे शपथ लेबयवाला विधायक सभ जँ एखनि चुप रहताह तऽ शपथ लेब मिथ्या सिद्ध होएत, हुनका सभकेँ अपन माटिक कर्ज चुकाबय पड़तनि, बाजय पड़तनि, मुद्दा मात्र ई अकादमी नहिं अछि, मुद्दा मिथिलेमे मैथिलीकेँ दबाबय केर अछि, प्राथमिक वर्गमे पढ़ौनी, मैथिली पत्र-पत्रिकाकेँ सहयोग, शास्त्रीय भाषाक दर्जा सहित लोकतांत्रिक दृष्टियें बिहारक प्राथमिक राजकीय भाषा बनाबय केर छैक।”
