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एमएलसी घनश्याम ठाकुर मैथिली पत्र-पत्रिकाकेँ सरकारी सहयोगक लेल सरकारकेँ लिखलनि चिट्ठी

मधुबनी समदिया!! आखिरकार एमएलसी घनश्याम ठाकुर मैथिली पत्र-पत्रिकाक सुधि लैत सरकारकेँ चिट्ठी लिखलनि।

जनतब जे बिहारक लगभग दू-तिहाई लोकक मैथिली भाषाक पत्र-पत्रिका, अखबार सरकारी सहयोगसँ वंचित रहि बिहारेमे हकन्न काटि रहल अछि, जखनि कि हिन्दी अंग्रेजी आदि भाषाक पत्र-पत्रिका, अखबार सरकारी सहयोगसँ फलि-फूलि रहल अछि। अपन घरेमे एहि प्रकारक मैथिली भाषाक उपेक्षा धीरे-धीरे मिथिलावासीमे असहज होबय लागल छल, खास कऽ एहि संचार तन्त्रक युगमे सहज सूचनाक आदान-प्रदानसँ ई बातक चर्चा होबय लागल छल, मुदा तथापि कोनो जनप्रतिनिधिक ध्यान एहि दिशि नहिं जाइत छल।

मुदा एहि विषय दिशि प्रायः प्रथम जनप्रतिनिधिक रुपमे आगू बढ़लथि एमएलसी घनश्याम ठाकुर। हुनक शोसल मिडिया पर एहि विषयमे सरकारकेँ लिखल पत्र एवं हुनक पोस्ट मिथिलावासीमे प्रसंशित भऽ रहल अछि आ खुब तकर चर्चा अछि।

एमएलसी घनश्याम ठाकुर लिखैत छथि, ” मैथिली मात्र भाषा नहिं, मिथिला केर अस्मिता अछि। राज्य सरकारक विज्ञापन नीतिमे मैथिली भाषाक समाचार पत्र सभकेँ समुचित स्थान देबाक मांगक संबंधमे बृहस्पति, दिनांक ०८ जनवरी २०२६ केँ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग केर माननीय मंत्री महोदयकेँ औपचारिक रूपसँ पत्र प्रदान कयल गेल अछि।”

ओ आगू लिखैत छथि जे, “मैथिली संविधानसँ मान्यता प्राप्त भाषा अछि, जेकरा करोड़ों लोक पढ़ैत-लिखैत छथि, मुदा एखन धरि सरकारी विज्ञापन नीतिमे मैथिली समाचार पत्र सभकेँ उचित सम्मान नहि भेट रहल अछि। ई स्थिति नहि केवल मैथिली पत्रकारिता लेल, बल्कि सम्पूर्ण मिथिला समाज लेल चिंताजनक अछि।”

आगू लिखलनि, “आशा अछि जे सरकार मैथिली भाषाक महत्व आ जनभावनाकेँ बुझैत शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेत, जाहिसँ मैथिली भाषा, साहित्य आ पत्रकारिताकेँ संरक्षण आ संवर्द्धन सुनिश्चित भऽ सकय।”

बिहार सरकारक सूचना एवं जनसंपर्क विभागक मंत्रीकेँ संबोधित करैत घनश्याम ठाकुर पत्रमे लिखलनि, “ई अत्यंत पीड़ादायक विषय अछि कि बिहार राज्यक एकटा प्रमुख एवं संवैधानिक रुपसँ मान्यता प्राप्त भाषा मैथिली, जकरा करोड़ो लोक लिखैत-पढ़ैत अछि, केँ वर्तमानमे राज्य सरकारक विज्ञापन नीतिमे समुचित स्थान नहिं देल गेल अछि।
विदित होय कि वर्तमान व्यवस्थामे हिन्दी, अंग्रेजी एवं उर्दू भाषाक मात्र समाचार पत्रकेँ सरकारी विज्ञापन प्रदान करबाक स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित अछि, जखनि कि मैथिली भाषाक समाचार पत्र एहि व्यवस्थासँ वंचित अछि। एहिसँ नहिं मात्र मैथिली जगतक पत्रकारिता जगतकेँ क्षति पहुँचि रहल अछि, बल्कि मैथिली भाषी जनसमुदायक संग अन्याय सेहो भऽ रहल अछि।

तें निवेदन अछि कि मैथिली भाषाक समाचार पत्र सभकेँ सेहो कमसँ कम उर्दू भाषाक समाचार पत्रक समकक्ष मानक निर्धारित करैत राज्य सरकारक विज्ञापन नीतिमे सम्मिलित करय केर कृपा कयल जाए, ताकि मैथिली भाषाक संरक्षण-संवर्धन एवं एकर पाठकक हितक रक्षा सुनिश्चित भऽ सकय।
आशा अछि अहाँ एहि महत्वपूर्ण विषय पर शिघ्र सकारात्मक निर्णय लऽ मैथिली भाषाक प्रति न्याय करब।”

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