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सौहार्दपूर्ण वातावरणमे संपन्न भेल साहित्यिक महाकुंभ – मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल-2026

मुंबई । समदिया

दिनांक 3 अप्रैलसँ शुरू भेल ई साहित्यिक महाकुंभ, 5 अप्रैल 2026 केँ अत्यंत उल्लासपूर्ण वातावरण संगहि सफलतापूर्वक संपन्न भेल। मुंबई उपनगर स्थित मढ़ द्वीप पर, दोसर बेर शुभसीता फॉउंडेशनक प्रस्तुति, मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर आयोजनमे देश-विदेशक रचनाकार संगहि स्थानीय मैथिलीप्रेमी सुधिजनक जमावड़ा देखल गेल। मैथिली लेखक संघ केर अध्यक्ष बिनोद कुमार झा (सरकार) केँ संयोजनमे, एहि कार्यक्रममे मैथिली साहित्य जगतक तमाम विद्वतजनक उपस्थिति आ सहभागिता, मुंबई मैथिल मैथिल समाज लेल कोनो सनेससँ कम नहि छल।

तीनदिवसीय एहि कार्यक्रममे साहित्य, काव्य, गीत संगीत, सिनेमा आ पत्रकारिता जगतक तमाम धुरंधर एकठाम आबि अप्पन – अप्पन विचार रखलनि। मिथिला विद्वानक धरती रहल अछि, आ ई परंपरा एखनहु कायम अछि, ई, एहि कार्यक्रमक सफल आयोजनसँ पुनः सिद्ध भेल अछि। अप्पन भाषाक समृद्ध विरासत आ गौरवशाली इतिहास केर, संसारक समक्ष रखबाक लेल ई मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल, अत्यधिक कारगर सिद्ध भ’ रहल अछि। ओना त’ मुंबईमे मैथिली साहित्यिक गतिविधि नहिए सन छल, मुदा विनोद कुमार झा केर प्रयाससँ आब, मुंबई आ उपनगर क्षेत्रमे नियमित रूपसँ साहित्यिक बैसारक आयोजन कएल जाइत अछि, परिणामस्वरूप मुंबई मैथिल समाजसँ सेहो बहुत रास रचनाकार लोकनि आगू आबि रहल छथि।

मुंबई मैथिली साहित्यिक बैसारमे नियमित रूपसँ सहभागी रचनाकार लोकनिक प्रयाससँ एकटा पोथी सेहो छपाओल गेल, जाहिमे बैसारक तमाम रचनाकार लोकनिक काव्यक समावेश कएल गेल अछि। गामसँ गेट – वे धरि, एहि पोथीक संपादक भास्करानंद झा भास्कर छथि, आ एहि फैस्टिवलक अंतिमदिन एहि पोथीक लोकार्पण सेहो संपन्न भेल। निश्चित रूपसँ एहि पोथीक लोकार्पण, एहि फेस्टिवलक उपलब्धि कहल जा सकैत अछि।

फेस्टिवल केर अवधिमे अनेको महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा – परिचर्चाक आयोजन सेहो भेल जाहिमे बहुत रास महत्वपूर्ण विषयक संग – संग भारतीय भाषिक परिदृश्यमे मैथिलीक स्थान आ भविष्य, समकालीन भारतीय साहित्यमे मैथिलीक वर्तमान परिदृश्य, मैथिली साहित्यमे एआई’क प्रभाव, कथाक वर्तमान स्वरुप, मैथिलि नाट्य लेखन-रंगमंचसँ कतेक लग आ दूर, मैथिली यात्रा वृतांत, आत्मकथा, आ संस्मरण, तहिना डिजिटल कंटेंट क्रिएटरक दायित्व, मैथिलि साहित्यमे स्त्री स्वर, मैथिली समकालीन कविता, संगहि मुंबई साहित्यिक बैसारमे मैथिली, आ मैथिली आंदोलनक सन्दर्भमे वृस्तृत चर्चा कएल गेल। सहभागी रचनाकार लोकनिमे, प्रदीप बिहारी, प्रवीण नारायण चौधरी, प्रीतम निषाद, केदार कानन, तारानंद वियोगी, विवेकानदं झा, कमलेश प्रेमेन्द्र, भास्कर झा, विभारानी, अविनाश दास, अजय ब्रह्मात्मज, डॉ विभा कुमारी, डॉ आभा झा, राजेश कुमार झा, विमल मिश्र, अक्षय आनंद सन्नी, प्रमुख छलथि।

अंतिम दिनक सत्रमे प्रमुख विषय छल, अनुवाद, मैथिली साहित्यमे दलित स्वर, बहुभाषा विमर्श, जाहिमे मैथिली रचनाकारक संग – संग राजस्थानी, गुजराती, भोजपुरी, ओड़िया, आ मराठी भाषाक रचनाकार लोकनि उपस्थित छलथि।

बादक सत्रमे मैथिली साहित्यसँ सिनेमा, मैथिलि सिनेमा – कथा कलाकार आ कैंचा, महत्वपूर्ण छल, जाहिमे मैथिली सिनेमासँ संबंधित – सजीव पूनम मिश्र, राजीव सिंह, राहुल सिन्हा, रूपक शरर, तुषार झा, कुणाल ठाकुर, किसलय कृष्ण, अमित झा, प्रियंशा झा, विजय झा, संगहि आनो आन लोकनि अप्पन विचार रखलनि। संध्याकालमे मैथिली शार्ट फिल्म रसनचौकी संगहि जानकी फिल्म्स द्वारा निर्मित मैथिलि फिल्म विद्यापतिक प्रदर्शन सेहो भेल।

कार्यक्रम समन्वयक केर रूपमे डॉ ममता झा आ धर्मेंद्र कुमार झा छलथि, त’ कार्यक्रमक पर्यवेक्षक आ शुभसीता फॉउंडेशनक मनोरमा मिश्र झा, संयोजक – विनोद कुमार झा, सह संयोजक आ मैथिली दर्पणक दीपक झा, एहि सफल कार्यक्रम लेल अत्यधिक प्रयास कएलनि आ सफल सेहो भेलाह। हिनकर सभक ई प्रयास निश्चित रूपसँ भाषा, साहित्य आ कलाक संरक्षण संवर्धनमे सहायक सिद्ध होयत।

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